लोकतंत्र का चौथा स्तंभ या ‘नारद मुनि’? CM साय और रमन सिंह ने पत्रकारों को बताए संसदीय रिपोर्टिंग के ‘गुरु-मंत्र’

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ या ‘नारद मुनि’? CM साय और रमन सिंह ने पत्रकारों को बताए संसदीय रिपोर्टिंग के ‘गुरु-मंत्र’
Raipur News: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ या ‘नारद मुनि’? , छत्तीसगढ़ विधानसभा के 25 वर्षों के गौरवशाली सफर के उपलक्ष्य में, शनिवार को विधानसभा परिसर में ‘संसदीय पत्रकारिता’ पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस विशेष मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पत्रकारों की भूमिका को लोकतंत्र के लिए अनिवार्य बताते हुए उनके काम को सराहा और महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
क्यों महत्वपूर्ण है संसदीय पत्रकारिता?
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही और आम जनता के बीच की खाई को पाटना था। वक्ताओं ने एक स्वर में माना कि पत्रकार ही वह सेतु हैं जो सदन के भीतर गूंजने वाली जनता की आवाज को वापस जनता तक पहुंचाते हैं।लोकतंत्र का चौथा स्तंभ या ‘नारद मुनि’?
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “पत्रकार बंधु बड़ी मेहनत से विधानसभा की कार्यवाही को कवर करते हैं। आपकी रिपोर्टिंग से ही आम नागरिक यह जान पाता है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि उनके मुद्दों को कितनी गंभीरता से उठा रहे हैं।” उन्होंने पत्रकारों को सम्मानित करने की परंपरा को उनके मनोबल के लिए जरूरी बताया।
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विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पत्रकारों के 25 वर्षों के योगदान को “अतुलनीय” बताया। उन्होंने कहा, “संसदीय पत्रकारिता एक संवेदनशील जिम्मेदारी है। पत्रकार जब पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं, तभी लोकतंत्र असल में मजबूत होता है।”
पत्रकारों के लिए 3 बड़े ‘गुरु-मंत्र’
इस कार्यशाला से पत्रकारों के लिए तीन प्रमुख संदेश निकलकर सामने आए:
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निष्पक्षता और गरिमा: डॉ. रमन सिंह ने जोर देकर कहा कि पत्रकारों को सदन की गोपनीयता, अनुशासन और गरिमा को बनाए रखते हुए सटीक जानकारी जनता तक पहुंचानी चाहिए।
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सरल भाषा में संवाद: उन्होंने यह भी सलाह दी कि विधानसभा की जटिल प्रक्रियाओं और बहसों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना आवश्यक है, ताकि आम आदमी भी उसे आसानी से समझ सके।
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लोकतंत्र के सजग प्रहरी बनें: नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पत्रकारों की भूमिका की तुलना ‘नारद मुनि’ से करते हुए उन्हें लोकतंत्र का सजग संवाहक बताया। उन्होंने कहा कि पत्रकार अपनी समयबद्धता और सजगता से लोकतंत्र को जीवंत रखते हैं।
पत्रकारिता का सम्मान और भविष्य की राह
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ और दिवंगत पत्रकारों को भी याद किया गया और उनके योगदान को नमन किया गया। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि यह कार्यशाला पत्रकारों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी और इसके माध्यम से विधानसभा की गतिविधियां और भी प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचेंगी। इस कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप और आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक संजय द्विवेदी समेत बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।लोकतंत्र का चौथा स्तंभ या ‘नारद मुनि’?









