गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: 3.01 करोड़ का टेंडर घोटाला, सवालों से बच रहे जिम्मेदार अधिकारी; क्या है पूरा मामला?

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: 3.01 करोड़ का टेंडर घोटाला, सवालों से बच रहे जिम्मेदार अधिकारी; क्या है पूरा मामला?, छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) में जिला पंचायत के करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों में बड़े भ्रष्टाचार की गूंज सुनाई दे रही है। 3 करोड़ 1 लाख 32 हजार रुपये के निर्माण कार्य से जुड़े इस कथित टेंडर घोटाले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) संभाग मरवाही के कार्यपालन अभियंता (EE) की भूमिका भी संदेह के घेरे में नजर आ रही है।
मीडिया के सवालों से बचते नजर आए कार्यपालन अभियंता
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: इस कथित घोटाले को लेकर जब मीडिया ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंता बीएल सिंहश्रे से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका रवैया बेहद चौंकाने वाला रहा। खबरों के मुताबिक, फोन पर उन्होंने खुद के कार्यालय में न होने की बात कही, लेकिन जब मीडिया की टीम उनके दफ्तर पहुँची, तो वे वहीं मौजूद पाए गए। अधिकारी का इस तरह सच छिपाना और बयान देने से कतराना मामले में उनकी संलिप्तता की आशंका को और गहरा कर रहा है।
फर्जी दस्तावेजों के दम पर टेंडर हासिल करने का आरोप
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: इस पूरे विवाद की जड़ ‘श्री जी कंस्ट्रक्शन’ द्वारा लगाया गया गंभीर आरोप है। शिकायत के अनुसार, एक अन्य ठेकेदार ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificate) और कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र लगाकर करोड़ों का टेंडर हासिल किया है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: हैरानी की बात यह है कि जिस मूल दस्तावेज को शिकायतकर्ता फर्म ने पेश किया था, उसी का कथित तौर पर फर्जी वर्जन दूसरे ठेकेदार द्वारा उपयोग किया गया। इसके बावजूद विभाग ने उसे पात्र घोषित कर दिया। यह सीधे तौर पर टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।
जांच समिति की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: किसी भी सरकारी निविदा (Tender) प्रक्रिया में दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने के लिए एक विशेष समिति होती है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब दो अलग-अलग फर्मों ने एक ही कार्य से संबंधित प्रमाण पत्र जमा किए, तो जांच समिति ने उसे नजरअंदाज क्यों किया? क्या यह केवल तकनीकी लापरवाही है या फिर इसके पीछे किसी बड़े ‘लेन-देन’ का खेल चल रहा है?
भ्रष्टाचार की आशंका और विभागीय चुप्पी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: विभागीय सूत्रों के बीच इस टेंडर को लेकर लाखों रुपये के कमीशन और बंदरबांट की चर्चाएं गर्म हैं। जिस तरह से जिम्मेदार अधिकारी सीधे जवाब देने के बजाय बचते फिर रहे हैं, उससे इस घोटाले की जड़ें काफी गहरी प्रतीत होती हैं।
क्या दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई?
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: वर्तमान में इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। ग्रामीणों और अन्य ठेकेदारों द्वारा मांग की जा रही है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस पर कोई सख्त कदम उठाता है या फिर यह करोड़ों का घोटाला भी सरकारी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगा।









