कांकेर की ‘पहाड़ी से घाटी तक’ जल क्रांति! ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान से भूजल रिचार्ज, मिट्टी कटाव पर भी लगेगी लगाम

कांकेर की ‘पहाड़ी से घाटी तक’ जल क्रांति! ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान से भूजल रिचार्ज, मिट्टी कटाव पर भी लगेगी लगाम
कांकेर: कांकेर की ‘पहाड़ी से घाटी तक’ जल क्रांति! ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान से भूजल रिचार्ज, छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में जल संरक्षण को लेकर एक ऐसी क्रांति शुरू हुई है, जो आने वाले समय में पानी की हर बूंद को सहेजकर इलाके की तस्वीर बदल देगी। ‘मोर गांव, मोर पानी’ महाभियान के तहत, जिला प्रशासन ‘पहाड़ी से घाटी तक’ की अनूठी नीति पर काम कर रहा है, जिसका मकसद सिर्फ जल संकट को दूर करना नहीं, बल्कि मिट्टी के कटाव जैसी बड़ी समस्या का भी स्थायी समाधान करना है।
क्या है ‘पहाड़ी से घाटी तक’ की यह कारगर नीति?
इस अभियान का मूल सिद्धांत बेहद सरल और प्रभावी है। बारिश का जो पानी पहाड़ियों से तेजी से बहकर नालों के जरिए बर्बाद हो जाता है, उसे पहाड़ी ढलानों पर ही छोटी-छोटी संरचनाएं बनाकर रोक लिया जाता है। इससे पानी का बहाव धीमा होता है और वह धीरे-धीरे जमीन में रिसकर भू-जल स्तर (Groundwater Level) को रिचार्ज करता है। यह पानी घाटी तक पहुँचने से पहले ही धरती की प्यास बुझा देता है।कांकेर की ‘पहाड़ी से घाटी तक’ जल क्रांति! ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान से भूजल रिचार्ज
3600 से ज्यादा संरचनाएं, आधुनिक GIS तकनीक का इस्तेमाल
कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में इस अभियान को तेज गति से चलाया जा रहा है। जिला पंचायत के सीईओ हरेश मंडावी ने बताया कि:
अब तक जिले की ग्राम पंचायतों में पहाड़ी ढलानों पर 3620 से अधिक संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं।
इस वर्ष 1666 से अधिक नए जल संरक्षण कार्यों को मंजूरी दी गई है।
इनमें तालाब, चेक डैम, सोखता गड्ढे, लूज बोल्डर चेक डेम, गैबियन स्ट्रक्चर और कंटूर ट्रेंच जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
इन कार्यों की प्लानिंग और निगरानी के लिए आधुनिक GIS (जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि सही जगह पर सही संरचना बनाई जा सके।
एक तीर से दो निशाने: जल संरक्षण के साथ मिट्टी कटाव का भी समाधान
पहले इन इलाकों में तेज बारिश के कारण बड़े पैमाने पर मिट्टी का कटाव होता था, जिससे खेतों की उपजाऊ मिट्टी बह जाती थी। अब इन संरचनाओं के निर्माण से दोहरा फायदा हो रहा है:
जल संरक्षण: बारिश का पानी रुक रहा है और भू-जल भंडार समृद्ध हो रहा है।
मिट्टी का बचाव: पानी का बहाव धीमा होने से मिट्टी का कटाव रुक गया है, जिससे खेती को भी फायदा मिल रहा है।
यह महाभियान न केवल कांकेर जिले में जल सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका को बेहतर बनाने में भी एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।कांकेर की ‘पहाड़ी से घाटी तक’ जल क्रांति! ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान से भूजल रिचार्ज



















