
Indigo Founder Story: कभी दिल्ली के सदर बाजार में बेचते थे टिकट, आज हैं ‘आसमान के सुल्तान’! मिलिए IndiGo के राहुल भाटिया से. आज भले ही इंडिगो (IndiGo) एयरलाइन भारी संकट और फ्लाइट कैंसिलेशन के दौर से गुजर रही हो, लेकिन इसके खड़े होने की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी का साम्राज्य खड़ा करने वाले राहुल भाटिया (Rahul Bhatia) का सफर दिल्ली की तंग गलियों से शुरू हुआ था।
सदर बाजार की गलियों से शुरू हुआ सफर
अक्सर हम सफलता की चमक देखते हैं, लेकिन उसके पीछे का संघर्ष नहीं। इंडिगो के को-फाउंडर राहुल भाटिया ने अपने करियर की शुरुआत बेहद सामान्य तरीके से की थी। एक समय था जब वे दिल्ली के सदर बाजार इलाके में एक छोटी सी जगह से फ्लाइट की टिकटें बेचा करते थे। यह वह दौर था जब ट्रैवल एजेंसी का काम ही उनका मुख्य पेशा था। सदर बाजार की उसी भागदौड़ के बीच उन्होंने एविएशन इंडस्ट्री के सपने देखने शुरू किए थे।Indigo Founder Story
ट्रैवल एजेंसी से ऐसे बनी देश की सबसे बड़ी एयरलाइन
राहुल भाटिया ने अपनी शुरुआती मेहनत और विजन के दम पर एक छोटी सी ट्रैवल एजेंसी को ‘इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज’ (InterGlobe Enterprises) जैसे विशाल साम्राज्य में बदल दिया। साल 2006 में उन्होंने राकेश गंगवाल के साथ मिलकर इंडिगो की शुरुआत की। उनका लक्ष्य साफ था- समय पर उड़ान और कम कीमत। इसी मंत्र ने उन्हें ट्रैवल एजेंट से एयरलाइन का मालिक बना दिया।Indigo Founder Story
मौजूदा संकट: क्यों लड़खड़ा रही है इंडिगो?
सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद, आज इंडिगो के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है। पिछले कुछ दिनों से इंडिगो में परिचालन (Operational) से जुड़ी गंभीर समस्याएं देखने को मिल रही हैं। हजारों फ्लाइट्स कैंसिल होने से यात्रियों का भरोसा डगमगाया है।Indigo Founder Story
क्षमता से ज्यादा उड़ान भरना पड़ा भारी?
एक्सपर्ट्स और रिपोर्ट्स का मानना है कि इंडिगो को इस संकट से निपटने के लिए अपनी रणनीति बदलनी होगी।Indigo Founder Story
ओवर-शेड्यूलिंग की आदत: एयरलाइन पर आरोप है कि वह अपनी क्षमता से ज्यादा फ्लाइट्स का शेड्यूल बना रही है, जिसे मैनेज करना मुश्किल हो रहा है।
ठोस कदम की जरूरत: अगर इंडिगो को अपनी पुरानी साख बचानी है, तो उसे ‘क्वांटिटी’ के बजाय ‘क्वालिटी’ पर ध्यान देना होगा और क्षमता के अनुसार ही उड़ानों का संचालन करना होगा।
सदर बाजार से शुरू हुआ यह सफर आज एक नाज़ुक मोड़ पर है। अब देखना यह है कि राहुल भाटिया की कंपनी इस ‘टरबुलेंस’ से बाहर कैसे निकलती है।Indigo Founder Story



















