केशकाल नगर पंचायत CMO विवाद: हाईकोर्ट में सुनवाई टली, अब 23 सितंबर को होगा फैसला

केशकाल नगर पंचायत के CMO पद को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में चल रहा विवाद और लंबा खिंचा। 3 सितंबर की सुनवाई में यथास्थिति बरकरार, अगली तारीख 23 सितंबर तय।
मुख्य बिंदु सबसे पहले
केशकाल नगर पंचायत में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की कुर्सी को लेकर चल रहा कानूनी टकराव और लंबा खिंच गया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में इस मामले की सुनवाई 3 सितंबर 2026 को हुई, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं आ सका। नतीजा यह है कि नगर पंचायत में फिलहाल दो-दो CMO काम करते नजर आ रहे हैं, और यह असमंजस अगली सुनवाई तक बना रहेगा।

यह मामला WPS क्रमांक 4549/2026 के तहत नामेश्वर कुमार कावड़े बनाम छत्तीसगढ़ शासन के रूप में दर्ज है। कोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है, जबकि पहले से लागू अंतरिम राहत को अगली तारीख तक जारी रखने का निर्देश दिया गया है।
अगली सुनवाई अब 23 सितंबर 2026 को होगी, जिस पर नगर पंचायत के कामकाज और आम जनता की निगाहें टिकी हैं।

क्या है पूरा विवाद?
केशकाल नगर पंचायत में CMO पद को लेकर टकराव की जड़ राज्य सरकार के एक स्थानांतरण आदेश में है।
- राज्य सरकार के आदेश के तहत देवेश चंदेल ने 15 जून को केशकाल नगर पंचायत के CMO का पदभार संभाला।
- इस स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए नामेश्वर कावड़े ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
- 18 जून को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया।
इसी आदेश के चलते नगर पंचायत में एक पद पर दो अधिकारी सक्रिय हो गए, और यह स्थिति अब लगभग ढाई महीने से बनी हुई है।

3 सितंबर की सुनवाई में क्या हुआ?
गुरुवार को हुई सुनवाई में दोनों पक्षों के अधिवक्ता मौजूद रहे:
- याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संदीप दुबे पेश हुए।
- राज्य शासन की ओर से डिप्टी जीए अनुजा शर्मा ने पक्ष रखा।
- प्रतिवादी क्रमांक 4 की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिवक्ता नूपुर त्रिवेदी और हार्दिक जायसवाल शामिल हुए।
- प्रतिवादी क्रमांक 5 की पैरवी अधिवक्ता अमन तांबोली ने की।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादी क्रमांक 4 को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। साथ ही मामले को 23 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, और तब तक पूर्व में दी गई अंतरिम राहत यथावत जारी रहेगी।
एक पद, दो अधिकारी: कैसे चल रहा है कामकाज?
कोर्ट के यथास्थिति आदेश की अवमानना से बचने के लिए दोनों अधिकारी अलग-अलग तरीके से काम कर रहे हैं।
देवेश चंदेल (सरकार द्वारा नियुक्त):
- कोई लिखित आदेश या निर्देश जारी नहीं कर रहे।
- सामग्री खरीद या भुगतान के लिए चेक जारी नहीं कर रहे।
- वार्डों का भ्रमण कर साफ-सफाई और पेयजल आपूर्ति का जायजा ले रहे हैं।
- पार्षदों और वार्डवासियों की समस्याएं सुनकर समाधान का प्रयास कर रहे हैं।
नामेश्वर कावड़े (स्थगन प्राप्त पूर्व CMO):
- दूसरे कक्ष में बैठकर काम कर रहे हैं।
- पूर्ववत मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में अधिकारों का उपयोग कर रहे हैं।
किस पर पड़ रहा है असर?
इस लंबे खिंचते कानूनी विवाद का सीधा असर नगर पंचायत के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ रहा है:
- नगर पंचायत के निर्वाचित पदाधिकारियों में असमंजस की स्थिति है।
- कर्मचारियों, ठेकेदारों और सामग्री सप्लायरों के भुगतान से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं।
- PIC (पार्षद समिति) और परिषद की बैठकें तथा अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य अटके हुए हैं।
- नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से भी अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजरें 23 सितंबर 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि हाईकोर्ट का फैसला राज्य सरकार के पक्ष में जाता है या नामेश्वर कावड़े के पक्ष में। तब तक केशकाल नगर पंचायत में दोहरी व्यवस्था और अनिश्चितता का माहौल बने रहने की संभावना है।









