कोंडागांव में छात्रों का हंगामा: परीक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के रवैये पर सवाल, सड़क जाम

कोंडागांव के माकड़ी विकासखंड स्थित हीरापुर हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के व्यवहार को लेकर धरना दिया, सड़क जाम कर निष्पक्ष जांच की मांग की।
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में मंगलवार को शिक्षा व्यवस्था को लेकर असंतोष सड़क पर उतर आया। माकड़ी विकासखंड के हीरापुर हायर सेकेंडरी स्कूल के नियमित छात्र-छात्राओं ने क्लास छोड़कर धरना दिया और सड़क जाम कर दिया।

छात्रों की शिकायत परीक्षा प्रणाली, स्कूल प्रबंधन के रवैये और शिक्षकों के व्यवहार से जुड़ी है। उनका आरोप है कि ओपन स्कूल के जरिए परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों से मोटी रकम वसूली जाती है और परीक्षा के दौरान नकल कराए जाने की शिकायतें भी हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।

क्या है छात्रों का मुख्य आरोप?
छात्रों ने बताया कि विद्यालय में ओपन स्कूल के नाम पर एक समानांतर व्यवस्था चल रही है, जिससे नियमित विद्यार्थियों के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
- 10वीं और 12वीं के ओपन स्कूल परीक्षार्थियों से कथित तौर पर करीब 8,000 से 10,000 रुपये तक की राशि लिए जाने का आरोप
- परीक्षा के दौरान अनुचित तरीके से नकल कराए जाने की शिकायत
- इस वजह से कुछ ओपन स्कूल परीक्षार्थियों के अंक नियमित छात्रों से ज्यादा आने की बात
छात्रों का कहना है कि ये सभी आरोप अभी शिकायत के स्तर पर हैं, और इनकी सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

नियमित छात्रों की पीड़ा क्या है?
प्रदर्शन कर रहे नियमित विद्यार्थियों ने कहा कि वे साल भर मेहनत कर परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी होती है, तो इसका सीधा असर उनके नतीजों, आगे की उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के मौकों पर पड़ सकता है।
छात्रों ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले भी अपनी समस्याएं स्कूल प्रबंधन के सामने रखी थीं, लेकिन गंभीरता से सुनवाई न होने पर उन्हें सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराना पड़ा।
स्कूल प्रशासन का क्या कहना है?
विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुखराम देवांगन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्र शिक्षकों की व्यवस्था को लेकर मांग कर रहे थे, जबकि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक मौजूद हैं। उनके मुताबिक बच्चों को समझाकर वापस क्लास भेज दिया गया।
हालांकि छात्रों द्वारा उठाए गए राशि वसूली और नकल के आरोपों पर प्रशासन की ओर से अलग से कोई विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने
इस मामले में पूर्व विधायक मोहन मरकाम ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नियमित छात्र-छात्राओं के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए और अगर जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता क्यों जरूरी?
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता किसी भी छात्र के भविष्य की नींव होती है। जब नकल या अनियमितता जैसी शिकायतें सामने आती हैं, तो इसका सीधा असर मेहनती विद्यार्थियों के मनोबल पर पड़ता है।
ऐसे मामलों में समय रहते निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि:
- दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों पर उचित कार्रवाई हो सके
- नियमित विद्यार्थियों के परिणामों की विश्वसनीयता बनी रहे
- भविष्य में इस तरह की शिकायतें दोबारा सामने न आएं
आगे क्या हो सकता है?
छात्रों की मुख्य मांग है कि शिक्षा विभाग पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराए और परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। फिलहाल मामले में प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई और जांच की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।









