महतारी वंदन योजना बनी ‘गेम चेंजर’: छत्तीसगढ़ की 70 लाख महिलाओं के खातों में अब तक पहुँचे 13,671 करोड़, माओवादी क्षेत्रों में भी दिखा असर
नवंबर 2025 तक योजना की 21 किस्तें जारी; महतारी शक्ति ऋण योजना के जरिए स्वरोजगार की ओर बढ़ रहीं प्रदेश की महिलाएं, माओवादी मुक्त गांवों तक पहुंची विकास की लहर।

रायपुर।
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा रहा है। ‘मोदी की गारंटी’ के तहत शुरू की गई महतारी वंदन योजना ने नवंबर 2025 तक सफलता के नए आयाम गढ़ दिए हैं। यह योजना अब न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश की सबसे बड़ी महिला प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाओं में शुमार हो गई है। राज्य सरकार ने नवंबर 2025 तक करीब 70 लाख महिलाओं के बैंक खातों में कुल 13,671 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर कर दी है।
21वीं किस्त जारी, हर महीने मिल रहा आर्थिक संबल
नवंबर 2025 में योजना की 21वीं किस्त जारी की गई। इस एक किस्त के तहत लगभग 69 लाख महिलाओं के खातों में 647 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी गई। मार्च 2024 से शुरू हुई इस योजना के तहत हर महीने मिलने वाले 1,000 रुपये ने महिलाओं की घरेलू अर्थव्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। अब महिलाएं अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों, जैसे राशन, दवाइयां और बच्चों की पढ़ाई के लिए किसी पर निर्भर नहीं हैं।छत्तीसगढ़ की 70 लाख महिलाओं के खातों में अब तक पहुँचे 13,671 करोड़, माओवादी क्षेत्रों में भी दिखा असर
माओवादी मुक्त गांवों में पहली बार पहुंची सरकारी मदद
इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका विस्तार है। यह योजना केवल शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे संवेदनशील इलाकों में भी इसका प्रभाव दिखा है। वर्ष 2025 में पहली बार माओवादी आतंक से मुक्त हुए गांवों की 7,658 महिलाओं को सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से लाभ पहुँचाया गया। यह आंकड़ा साबित करता है कि सरकारी योजनाएं अब उन कठिन और जोखिम भरे क्षेत्रों तक भी पहुंच रही हैं, जो दशकों से विकास की मुख्यधारा से कटे हुए थे।छत्तीसगढ़ की 70 लाख महिलाओं के खातों में अब तक पहुँचे 13,671 करोड़, माओवादी क्षेत्रों में भी दिखा असर
केवल नकद नहीं, स्वरोजगार की भी गारंटी
सरकार ने केवल नकद सहायता तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए ‘महतारी शक्ति ऋण योजना’ की भी शुरुआत की है।छत्तीसगढ़ की 70 लाख महिलाओं के खातों में अब तक पहुँचे 13,671 करोड़, माओवादी क्षेत्रों में भी दिखा असर
ऋण राशि: ग्रामीण बैंकों के माध्यम से 10,000 से 25,000 रुपये तक।
उद्देश्य: किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई, फूड स्टॉल और पशुपालन जैसे स्वरोजगार शुरू करना।
सुविधा: आसान किस्तों में 48 महीनों के भीतर ऋण चुकाने की व्यवस्था।
इस पहल से हजारों महिलाएं अब गृहिणी से उद्यमी बनने की राह पर हैं।
डिजिटल साक्षरता और सामाजिक सम्मान में वृद्धि
योजना को पारदर्शी बनाने के लिए अपनाई गई प्रक्रियाओं ने महिलाओं को ‘डिजिटल साक्षर’ बना दिया है। बैंक खाता खोलना, आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं ने उन्हें औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ दिया है। सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि जब महिलाओं के हाथ में पैसा आता है, तो परिवार में उनकी निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को ‘मांगने वाले’ की भूमिका से निकालकर ‘खर्च करने वाले’ की भूमिका में ला खड़ा किया है, जिससे उनका आत्मसम्मान बढ़ा है।छत्तीसगढ़ की 70 लाख महिलाओं के खातों में अब तक पहुँचे 13,671 करोड़, माओवादी क्षेत्रों में भी दिखा असर
एक नजर में योजना का सफर (नवंबर 2025 तक):
शुरुआत: 1 मार्च 2024 (भाजपा सरकार द्वारा)।
कुल लाभार्थी: लगभग 70 लाख महिलाएं।
मासिक सहायता: ₹1,000 प्रति माह।
कुल वितरित राशि: ₹13,671 करोड़ 68 लाख से अधिक।
ताजा स्थिति: 21 किस्तें सफलतापूर्वक जारी।
छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल साबित करती है कि अगर नीति स्पष्ट हो, तो सामाजिक और आर्थिक बदलाव की रफ्तार को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। महतारी वंदन योजना आज प्रदेश की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का पर्याय बन चुकी है।छत्तीसगढ़ की 70 लाख महिलाओं के खातों में अब तक पहुँचे 13,671 करोड़, माओवादी क्षेत्रों में भी दिखा असर














