छत्तीसगढ़ की स्कूली किताबों में अब बोरे-बासी, तुलसी-गिलोय और स्थानीय संस्कृति भी पढ़ेंगे बच्चे

छत्तीसगढ़ SCERT ने पाठ्यक्रम में बदलाव का प्रस्ताव NCERT को भेजा है। अब किताबों में बोरे-बासी, ढोकरा कला, तुलसी-गिलोय के औषधीय गुण और राज्य का इतिहास पढ़ाया जाएगा।
छत्तीसगढ़ की स्कूली किताबों में अब दिखेगी राज्य की अपनी माटी की खुशबू
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब पाठ्यपुस्तकों में अपने ही राज्य की संस्कृति, परंपराएं और स्थानीय ज्ञान पढ़ने को मिलेंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने विषय विशेषज्ञों की मदद से पाठ्यक्रम में बदलाव का एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसे मंजूरी के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को भेजा गया है।

अगर NCERT से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो अगले शैक्षणिक सत्र से छत्तीसगढ़ की छठवीं, सातवीं और आठवीं कक्षा की किताबों में बोरे-बासी, ढोकरा शिल्प, स्थानीय जड़ी-बूटियों और राज्य के इतिहास से जुड़े नए पाठ पढ़ाए जा सकते हैं।
इस बदलाव के पीछे मकसद यह है कि बच्चे किताबी ज्ञान के साथ-साथ अपने आसपास के पर्यावरण, खान-पान और परंपराओं को भी बेहतर तरीके से समझ सकें।

विज्ञान की किताब में अब बोरे-बासी और सल्फी जैसे स्थानीय उदाहरण
नए ड्राफ्ट के मुताबिक कक्षा आठवीं के विज्ञान पाठ्यक्रम में कई स्थानीय उदाहरणों को शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि वैज्ञानिक सिद्धांतों को आसान भाषा में समझाया जा सके।
- स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत अंबिकापुर और बिलासपुर के बिल्हा क्षेत्र के सफल मॉडलों को उदाहरण के रूप में जोड़ने का प्रस्ताव है।
- किण्वन (fermentation) की प्रक्रिया समझाने के लिए बोरे-बासी, सल्फी और हड़िया जैसे स्थानीय खाद्य और पेय पदार्थों का उदाहरण दिया जाएगा।
- खाद्य कवक यानी फंगस के उदाहरण के तौर पर स्थानीय स्तर पर मशहूर ‘फूटू’ को शामिल किया गया है।
- बस्तर की मशहूर ढोकरा कला, साथ ही तुलसी, गिलोय और हर्रा जैसी जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों को भी पाठ्यक्रम में जगह दी जाएगी।
- कानन पेंडारी, जंगल सफारी और हसदेव बांध जैसे पर्यटन स्थलों के साथ प्रवासी पक्षियों से जुड़ी जानकारी भी बच्चों को पढ़ाई जाएगी।
सामाजिक विज्ञान में इतिहास, भूगोल और अर्थशास्त्र तीनों में स्थानीय झलक
सिर्फ विज्ञान ही नहीं, सामाजिक विज्ञान की किताबों में भी राज्य से जुड़े कई नए पहलू जोड़े जाने का प्रस्ताव है।

भूगोल में क्या जुड़ेगा? कक्षा आठवीं के भूगोल खंड में चित्रकोट जलप्रपात, रविशंकर जलाशय और राज्य में पाए जाने वाले प्रमुख खनिजों का उल्लेख किया जाएगा।
नागरिक शास्त्र में क्या बदलेगा? छत्तीसगढ़ विधानसभा और राज्य निर्वाचन आयोग के कामकाज को समझाया जाएगा। इसके साथ ही आदिवासी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों को अखबारों की कतरनों के जरिए दर्शाने का प्रस्ताव है।
इतिहास और अर्थशास्त्र में क्या नया होगा? इतिहास खंड में छत्तीसगढ़ की पुरानी रियासतों और कल्चुरी वंश के शासकों द्वारा चलाए गए सिक्कों का जिक्र होगा। वहीं अर्थशास्त्र में गढ़कलेवा, बस्तर शिल्प, कोसा सिल्क, जूट उद्योग, मृदा कला (मिट्टी की कला) और बांस से बनी वस्तुओं की तस्वीरों को शामिल करने की योजना है।
हिन्दी की किताबों में तीजन बाई, रामगढ़ की गुफाएं और शिवनाथ नदी
हिन्दी विषय की किताबों में भी अलग-अलग कक्षाओं के हिसाब से छत्तीसगढ़ से जुड़े साहित्यिक और सांस्कृतिक पाठ जोड़े जा रहे हैं।
- कक्षा आठवीं: छत्तीसगढ़ के प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम, छत्तीसगढ़ी बोधकथा ‘धन के पांच दाना’, ‘कहां गई नन्ही गौरैया’ और ‘सिखावन दोहे’ जैसे पाठ शामिल किए जाएंगे।
- कक्षा सातवीं: पद्मविभूषण तीजन बाई के जीवन पर आधारित पाठ, छत्तीसगढ़ी बोधकथा ‘मितानिन’ और कवि देवेंद्र नारायण शुक्ल की कविता ‘बादर’ पढ़ाई जाएगी।
- कक्षा पांचवीं: रामगढ़ की गुफाओं, शिवनाथ नदी की यात्रा और गुरु घासीदास उद्यान से जुड़े पाठ जोड़े जाएंगे।
बदलाव का मकसद क्या है?
इस पूरी कवायद के पीछे सोच यह है कि बच्चे जब अपने आसपास के पर्यावरण, खान-पान, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में किताबों में पढ़ेंगे, तो पढ़ाई उनके लिए ज्यादा व्यावहारिक और रोचक बन जाएगी।
क्या बदलेगा? बच्चों को अब सिर्फ किताबी और दूर की मिसालों की जगह अपने राज्य से जुड़े उदाहरण पढ़ने को मिलेंगे, जिससे विषय को समझना आसान होगा।
किस पर असर पड़ेगा? इसका सीधा असर छठवीं से आठवीं तक के छात्रों की विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और हिन्दी की किताबों पर पड़ेगा। साथ ही यह कदम राज्य की सांस्कृतिक विरासत, ढोकरा शिल्प और लोक-परंपराओं के संरक्षण की दिशा में भी एक प्रयास माना जा रहा है।
आगे क्या होगा? फिलहाल यह प्रस्ताव NCERT के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। एनसीईआरटी की स्वीकृति मिलने के बाद ही यह तय होगा कि इसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा या नहीं। आधिकारिक पुष्टि और अंतिम पाठ्यक्रम की जानकारी आने वाले समय में स्पष्ट होगी।









