
PHE Department Durg : सुचना का अधिकार अधिनियम की खुलेआम अवमानना कर रहे है पीएचई विभाग दुर्ग
सुचना का अधिकार अधिनियम जो कि संसद द्वारा नागरिको की सुविधा बनाया गया कानून है जिसकी खुलेआम अवमानना कर रहे है पीएचई विभाग दुर्ग के जनसूचना अधिकारी l
SCG News desk Durg :-
बात दरअसल ये है कि आवेदक डॉ ताराचंद चंद्राकर (सामाजिक कार्यकर्ता एवम पत्रकार) द्वारा पीएचई विभाग के खंड कार्यालय दुर्ग में दिनांक 10/10/2022 को 5 अलग-अलग सूचना का अधिकार आवेदन किया था जिसकी अधिनियम के नियमानुसार 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के बाद भी पीएचई विभाग दुर्ग के जन सूचना अधिकारी द्वारा जानबूझकर कोई जानकारी नहीं दी गई ।
इससे तो साफ स्पष्ट हो रहा है की इस विभाग में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है। अब यह समझ से परे है कि आवेदक करे तो क्या करे !! अपीलीय अधिकारी का नाम एवम पता नही मिलने पर उनकी अपील कहां करें ?

दूसरा रास्ता बचता है शिकायत का लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति नहीं होने एवम आयुक्त का पद रिक्त होने से यह शिकायत करने पर मामला ठंडे बस्ते में चले जाता है, शिकायत का निराकरण होते होते या तो अधिकारी अपना ट्रांसफर दूसरी जगह करा लेते है या वीआर ले लेते है जिनके चलते उनके ऊपर कोई भी अनुशासनिक कार्यवाही नहीं होती है। जिससे भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले और बुलंद होते चले जाते हैं और वे खुलेआम भ्रष्टाचार को अंजाम देते है जिसमे उनके विभागीय उच्च अधिकारियो की मौन स्वीकृति भी रहती है।

क्या कहता है सूचना का अधिकार अधिनियम
यह अधिनियम 12 अक्टूबर सन 2005 से पूर्णतः लागू हुआ था । जिसका उद्देश्य नागरिक द्वारा सूचना का अधिकार के माध्यम से लोक प्राधिकारीयो के नियंत्रण में रखी सूचना पाना सुनिश्चित किया जा सके जिससे कि प्रत्येक लोक प्राधिकारी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता तथा उत्तरदायित्व को बढ़ावा दिया जा सके।
भारत के संविधान ने लोकतंत्र की स्थापना की है और लोकतंत्र सूचना प्राप्त नागरिक वर्ग तथा सूचना की पारदर्शिता की अपेक्षा करता है। नागरिक और सूचना सरकारों की उचित कार्य पद्धति कार्यक्रम तथा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अनिवार्य है शिक्षित नागरिक और सूचना यह दोनों सरकारों और उसके परिकरणो को हुकूमत अर्थात जनता के शासन के प्रति उत्तरदाई बनाने के लिए भी अनिवार्य है।
अधिनियम के अनुसार प्रत्येक शासकीय अर्धशासकीय एवं शासन द्वारा वित्त पोषित संस्थान इत्यादि कार्यालय में जन सूचना अधिकारी रहेंगे। प्रत्येक जन सूचना अधिकारी को सूचना का आवेदन का जवाब देने के लिए विधि द्वारा 30 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। एवम दिए गए जवाब में अपना नाम पदनाम एवं अपीलीय अधिकारी का नाम पदनाम एवं पूर्ण पता लिखना है।
इसके लिए भी छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर कहा है कि, प्रत्येक जन सूचना अधिकारी को सूचना का अधिकार आवेदन के निराकरण में अपना नाम पदनाम कार्यालय का पूर्ण पता एवं अपीलीय अधिकारी का नाम पदनाम एवं उनके कार्यालय का पूर्ण पता देना है। लेकिन इसके बावजूद जन सूचना अधिकारी नियमों को ताक में रखकर खुलेआम सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की अवमानना कर रहे हैं । जिसके लिए सामान्य प्रशासन को उनके ऊपर सख्त कदम उठाना चाहिए, अन्यथा नागरिकों का सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रति विश्वास खत्म हो जाएगा।
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