सेखवा स्ट्रीट लाइट घोटाला: लाखों की सरकारी रकम डकारी, FIR में देरी क्यों? प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल

सेखवा स्ट्रीट लाइट घोटाला: लाखों की सरकारी रकम डकारी, FIR में देरी क्यों? प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल
मरवाही (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही): छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की ग्राम पंचायत सेखवा में स्ट्रीट लाइट योजना के नाम पर हुए लाखों रुपये के कथित घोटाले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि सरकारी धन की खुलेआम लूट की गई, लेकिन दस्तावेजी सबूत और नाम सामने होने के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता का है, बल्कि जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंचाने वाला है।सेखवा स्ट्रीट लाइट घोटाला
घोटाले के मुख्य किरदार: किसकी क्या भूमिका?
इस कथित घोटाले में तीन प्रमुख नाम उभरकर सामने आ रहे हैं, जिनकी तिकड़ी पर पूरे षड्यंत्र को अंजाम देने का आरोप है:
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सचिव गीता मार्को: इन पर आरोप है कि इन्होंने अपनी पुरानी कार्यशैली को दोहराते हुए इस घोटाले की पटकथा लिखी। इनका नाम पहले भी कई अनियमितताओं में सामने आ चुका है।
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ठेकेदार दिनेश वासुदेव: आरोप है कि इन्होंने फर्जी बिल, घटिया गुणवत्ता वाली लाइटें और कथित तौर पर नकली सप्लायरों के माध्यम से सरकारी खजाने को चूना लगाया।
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उपयंत्री संजय राजपूत: इनकी भूमिका जांच और सत्यापन की थी, लेकिन आरोप है कि वे इस घोटाले में मूक दर्शक बने रहे और फर्जी माप पुस्तिकाओं (Measurement Books) पर बिना जांच-पड़ताल के हस्ताक्षर करते रहे।
कैसे हुआ यह घोटाला? परत दर परत खुलासा
प्राप्त जानकारी और दस्तावेजों के अनुसार, घोटाले को निम्नलिखित तरीके से अंजाम दिया गया:
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स्वीकृति और हकीकत में अंतर: शासन से 119 स्ट्रीट लाइटों के लिए राशि स्वीकृत कराई गई, लेकिन मौके पर केवल 74 लाइटें ही मिलीं, वह भी बेहद घटिया गुणवत्ता की, जो कथित तौर पर कुछ ही समय में खराब हो गईं।
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फर्जी बिलों का खेल: बिजली सामग्री के नाम पर ईंट, गिट्टी, मुरूम और पानी टंकी जैसी असंबद्ध वस्तुओं के फर्जी बिल लगाकर भुगतान कराया गया।
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15वें वित्त आयोग की राशि का दुरुपयोग: यह पूरा घोटाला 15वें वित्त आयोग के तहत विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि से किया गया, जो सीधे तौर पर जनता के हक का पैसा है।
जांच रिपोर्टों में क्या? क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
विभिन्न जांच रिपोर्टों और स्थलीय निरीक्षणों में भी घोटाले के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। दस्तावेजों से यह साफ जाहिर होता है कि यह लूट पूरी तरह सुनियोजित थी। इसके बावजूद, FIR दर्ज न होना प्रशासन की मंशा पर संदेह पैदा करता है और यह सवाल उठता है कि क्या दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है?सेखवा स्ट्रीट लाइट घोटाला
जनता की सीधी मांगें:
क्षेत्र की जनता और जागरूक नागरिक इस पूरे प्रकरण पर आक्रोशित हैं और निम्नलिखित प्रमुख मांगें कर रहे हैं:
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आरोपी सचिव गीता मार्को को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर बर्खास्त किया जाए।
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ठेकेदार दिनेश वासुदेव और उपयंत्री संजय राजपूत के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
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सभी संबंधित बिलों और भुगतानों की गहन फॉरेंसिक ऑडिट कराई जाए।
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सभी आरोपियों की संपत्ति जब्त कर सरकारी धन की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित की जाए।
सिर्फ घोटाला नहीं, जनता के भरोसे का सवाल
यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के सम्मान का भी है। जब घोटाले के तथ्य, आरोपी और दस्तावेज सब स्पष्ट हैं, तो FIR दर्ज करने में देरी क्यों हो रही है? क्या प्रशासनिक चुप्पी किसी मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है? प्रशासन भले ही मौन हो, लेकिन क्षेत्र की जनता अब इस मुद्दे पर चुप बैठने को तैयार नहीं है और जवाब मांग रही है: आखिर FIR कब होगी?सेखवा स्ट्रीट लाइट घोटाला









