वाड्रफनगर में शिक्षक हटाए जाने से नाराज छात्र सड़क पर, 27 बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई

बलरामपुर-रामानुजगंज के भरुहीबांस और मुरकौल स्कूलों में शिक्षक कमी और शिक्षक हटाए जाने से नाराज छात्र-छात्राएं सड़क किनारे धरने पर बैठ गए हैं।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों और ग्रामीणों में गहरा असंतोष सामने आया है। ग्राम भरुहीबांस के मिडिल स्कूल में एक शिक्षक को हटाए जाने से नाराज होकर 27 छात्र-छात्राओं ने स्कूल जाना बंद कर दिया और स्कूल के बाहर सड़क किनारे टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए हैं।

इसी ब्लॉक के ग्राम मुरकौल स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में भी शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थी और ग्रामीण लंबे समय से परेशानी जता रहे हैं, जिसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। दोनों गांवों के लोगों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग करते हुए कलेक्टोरेट घेराव की चेतावनी दी है।
भरुहीबांस में क्यों भड़का विरोध?
भरुहीबांस मिडिल स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक मनोज गुप्ता को हटाए जाने के बाद विद्यार्थियों में नाराजगी फैल गई। छात्रों का कहना है कि वे उन्हें अच्छी तरह पढ़ाते थे, और उनके जाने से पढ़ाई पर सीधा असर पड़ा है।

- कुल 27 छात्र-छात्राओं ने स्कूल जाना बंद किया।
- बच्चे स्कूल के बजाय सड़क किनारे टेंट लगाकर बैठे हैं।
- विद्यार्थियों की मांग है कि जब तक शिक्षक की वापसी नहीं होती, वे कक्षा में नहीं लौटेंगे।
मुरकौल स्कूल में शिक्षकों की कमी बनी समस्या
वहीं ग्राम मुरकौल के हायर सेकेंडरी स्कूल में मामला थोड़ा अलग है। यहां विद्यार्थी और ग्रामीण लंबे समय से शिक्षकों की कमी की शिकायत कर रहे हैं। बताया गया है कि:
- स्कूल में पर्याप्त शिक्षक न होने से नियमित कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं।
- महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है।
- ग्रामीणों ने रिक्त पदों के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है।
क्या बदला, क्यों बढ़ा गुस्सा?
दोनों गांवों में स्थिति भले अलग हो, लेकिन नाराजगी की जड़ एक जैसी है—प्रशासनिक फैसलों का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ना। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के निर्णय लेने से पहले स्कूल संचालन और छात्रों के हित को ध्यान में रखा जाना चाहिए था।

किस पर पड़ेगा असर?
इस विरोध का सबसे सीधा असर उन 27 छात्र-छात्राओं की नियमित पढ़ाई पर पड़ रहा है जो फिलहाल स्कूल के बजाय सड़क पर धरने पर बैठे हैं। इसके अलावा मुरकौल स्कूल के अन्य विद्यार्थियों की पढ़ाई भी शिक्षकों की कमी के कारण प्रभावित हो रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा आंदोलन का रूप ले सकता है।
ग्रामीणों की चेतावनी—कलेक्टोरेट घेराव
दोनों गांवों के ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि मुरकौल में शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई और भरुहीबांस में शिक्षक की बहाली को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ, तो वे एकजुट होकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे। हालांकि ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका मकसद विवाद बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई को पटरी पर लाना है।
आगे क्या होगा?
मामले पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्याम किशोर जायसवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि विद्यार्थियों के हड़ताल पर बैठने की जानकारी मिली है और स्थिति का जायजा लेने के लिए टीम भेजी जा रही है। टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर स्पष्टता आएगी। फिलहाल दोनों मामलों में आधिकारिक निर्णय का इंतजार है।









