सूरजपुर: मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल में छात्रों से कराई गई पुताई, शिक्षा विभाग ने बैठाई जांच

सूरजपुर: मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल में छात्रों से कराई गई पुताई, शिक्षा विभाग ने बैठाई जांच, छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है। यहाँ एक नामी स्कूल में बच्चों से मजदूरी और पुताई कराने का गंभीर आरोप लगा है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
क्या है पूरा मामला?
मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल में छात्रों से कराई गई पुताई, सूरजपुर जिले के तिलसिवा स्थित मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल (CM DAV Public School) में पढ़ने वाले छात्रों से स्कूल परिसर में पुताई और निर्माण कार्य कराए जाने का मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि जिन बच्चों से यह काम कराया गया, वे शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत स्कूल में पढ़ रहे हैं। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूली ड्रेस पहने बच्चे दीवारों पर पेंट करते नजर आ रहे हैं।
परिजनों का फूटा गुस्सा, कलेक्टर से की शिकायत
मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल में छात्रों से कराई गई पुताई, वीडियो वायरल होने के बाद छात्रों के अभिभावकों में भारी आक्रोश है। परिजनों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों को शिक्षा देने के बजाय उनसे जबरन श्रम कराया जा रहा है, जो कि बाल अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने दोषी प्राचार्य के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल में छात्रों से कराई गई पुताई, मामले के तूल पकड़ते ही जिला शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया है। यह टीम स्कूल जाकर तथ्यों की पड़ताल करेगी और छात्रों व स्टाफ के बयान दर्ज करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ उचित वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
आरटीई (RTE) छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल में छात्रों से कराई गई पुताई, इस घटना ने निजी स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ने वाले गरीब बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्कूलों में इस तरह की गतिविधियां न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि यह बच्चों के मानसिक विकास पर भी बुरा असर डालती हैं। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।



















