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दुर्ग जिला पंचायत में ‘चाय-नाश्ता घोटाला’: 50 रुपये की थाली 230 में, कलेक्टर से जांच की मांग

युवा कांग्रेस नेता ने किया खुलासा, फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी खजाने को हजारों का चूना लगाने का आरोप, बिना GST बिल के भुगतान पर सवाल

दुर्ग : दुर्ग जिला पंचायत में ‘चाय-नाश्ता घोटाला’: 50 रुपये की थाली 230 में, कलेक्टर से जांच की मांग. दुर्ग जिला पंचायत में चाय-नाश्ते के नाम पर कथित रूप से बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। युवा कांग्रेस नेता यशवंत देशमुख ने जनदर्शन में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें दावा किया गया है कि जिला पंचायत कार्यालय द्वारा 50 रुपये के चाय-नाश्ते के लिए 230 रुपये का अवैध भुगतान किया गया है। यह मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है और सरकारी राजस्व की ‘खुलेआम डकैती’ के रूप में देखा जा रहा है।

अविश्वसनीय बिल: 50 रुपये का नाश्ता 230 रुपये में!

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शिकायत में बताया गया है कि चाय (₹10), नाश्ता (₹30) और पानी (₹10) मिलाकर प्रति व्यक्ति वास्तविक लागत मात्र ₹50 आती है। इसके बावजूद, जिला पंचायत कार्यालय ने इन साधारण वस्तुओं के लिए प्रति प्लेट ₹230 का भुगतान किया है। इसका मतलब है कि प्रति प्लेट ₹180 रुपये की सीधी ‘लूट’, जो कि एक मनरेगा मजदूर की एक दिन की मजदूरी से भी अधिक है।दुर्ग जिला पंचायत में ‘चाय-नाश्ता घोटाला’

बिना GST बिल के भुगतान पर गंभीर सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह भुगतान बिना GST बिल के किया गया है, जो वित्तीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। जहां ग्राम पंचायतों में भी बिना GST बिल के भुगतान नहीं किया जाता, वहीं जिला पंचायत जैसे उच्च कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर कई बार ऐसे भुगतान किए गए हैं।दुर्ग जिला पंचायत में ‘चाय-नाश्ता घोटाला’

महिला स्व-सहायता समूह की अनदेखी और छोटी दुकान को हजारों का भुगतान

दुर्ग जिला पंचायत ने गढ़ कलेवा का टेंडर महिला समूह को दिया है, जहां सिर्फ ₹130 में पूरी स्पेशल थाली उपलब्ध है। इसके बावजूद, चाय-नाश्ता के नाम पर 230 रुपये की खरीद एक छोटी सी चाय दुकान से की गई। इससे सवाल उठता है कि महिला समूहों के उत्थान की बातें केवल कागजों पर ही क्यों हैं, और बेहतर विकल्प होने के बावजूद एक छोटी दुकान को इतना बड़ा बिल किसकी सिफारिश पर मिला?दुर्ग जिला पंचायत में ‘चाय-नाश्ता घोटाला’

दुकानदार ने खोली पोल: ‘खाली बिल दिया था’

इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब ‘चौहान चाय-नाश्ता सेंटर’ के मालिक ने स्वयं कहा कि उन्होंने सिर्फ खाली बिल दिया था। बिल में लिखावट और राशि जिला पंचायत या किसी अन्य के द्वारा भरी गई थी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। मालिक ने यह भी बताया कि बिल पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बिल में हेरफेर कार्यालय में बैठकर की गई और संख्या व दरें मनमानी तरीके से भरी गईं, जो पूर्वनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।दुर्ग जिला पंचायत में ‘चाय-नाश्ता घोटाला’

राजस्व की डकैती या ‘चाय-नाश्ता घोटाला’?

कुछ ही घंटों की दो बैठकों का बिल 20 हजार और 35 हजार रुपये तक पहुंच जाना कोई साधारण त्रुटि नहीं, बल्कि राजस्व की सीधी लूट है। युवा कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया है कि क्या जिला प्रशासन इस ‘खुली डकैती’ पर कठोर कार्रवाई करेगा या ‘अपना हिस्सा’ लेकर मौन साध लेगा। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि सिर्फ चाय-नाश्ते के दो बिलों में यह स्थिति है, तो अन्य बिलों की जांच में लाखों रुपये का घोटाला सामने आना कोई बड़ी बात नहीं होगी।दुर्ग जिला पंचायत में ‘चाय-नाश्ता घोटाला’

15वीं वित्त की राशि का दुरुपयोग

शिकायत में यह भी बताया गया है कि यह राशि 15वीं वित्त आयोग की है, जो गांवों के विकास, बुनियादी सुविधाओं और जनहित के लिए होती है। लेकिन यहां अधिकारियों ने इसे चाय-पानी और नाश्ते के नाम पर फर्जी बिल बनाकर ‘कमाई का जरिया’ बना दिया है।दुर्ग जिला पंचायत में ‘चाय-नाश्ता घोटाला’

कलेक्टर से कठोर कार्रवाई की मांग

युवा कांग्रेस नेता यशवंत देशमुख ने दुर्ग कलेक्टर से इस मामले में तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  1. फर्जी भुगतान की तत्काल वसूली (रिकवरी) की जाए।

  2. संबंधित जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित किया जाए।

  3. पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं व्यापक जांच कराई जाए।

  4. जिला पंचायत के सभी बिलों का ऑडिट कराया जाए।

यह मामला दुर्ग जिला में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है, जहां आम जनता एक-एक रुपये की सुविधा का इंतजार करती है, वहीं अधिकारी चाय के बिल पर ही हजारों रुपये उड़ा रहे हैं। देखना होगा कि शासन इस ‘भ्रष्टाचार की चाय’ पर क्या कदम उठाता है।दुर्ग जिला पंचायत में ‘चाय-नाश्ता घोटाला’

Dr. Tarachand Chandrakar

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