सकोला में भू-माफियाओं का आतंक: शासकीय भूमि पर अतिक्रमण जारी

गौरेला पेंड्रा मरवाही: प्रशासनिक कार्यवाही का इंतजार
सकोला में बढ़ते अवैध कब्जे का मामला
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के सकोला में भू-माफियाओं का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। शासकीय राशन दुकान के बगल स्थित बेशकीमती भूमि (खसरा नंबर 387/388) पर अवैध निर्माण का सिलसिला जारी है। ग्रामीणों के विरोध और कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सकोला में भू-माफियाओं का आतंक: शासकीय भूमि पर अतिक्रमण जारी

शासकीय भूमि पर मकान निर्माण
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि भू-माफियाओं ने राजस्व विभाग की अनदेखी का फायदा उठाते हुए शासकीय भूमि पर मकान निर्माण शुरू कर दिया है। यह भूमि सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित थी, लेकिन अब इसे निजी स्वार्थ के लिए कब्जाया जा रहा है। सकोला में भू-माफियाओं का आतंक: शासकीय भूमि पर अतिक्रमण जारी

ग्रामीणों ने की प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्राम के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस अवैध कब्जे के खिलाफ कलेक्टर और तहसील कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि शासकीय भूमि को भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराया जाए। हालांकि, अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। सकोला में भू-माफियाओं का आतंक: शासकीय भूमि पर अतिक्रमण जारी

प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो अन्य शासकीय भूमि पर भी इसी प्रकार अतिक्रमण का खतरा है। सकोला में भू-माफियाओं का आतंक: शासकीय भूमि पर अतिक्रमण जारी









![शिक्षा सत्र का डेढ़ माह बीता, अब तक स्कूलों में नहीं पहुंचीं किताबें, पुरानी पुस्तकों के सहारे भविष्य की पढ़ाई गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र 2025-26 शुरू हुए डेढ़ महीने से अधिक का समय हो गया है, लेकिन गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के सरकारी स्कूलों में छात्रों के बस्ते अब भी खाली हैं।[1] पाठ्य पुस्तक निगम की लापरवाही के चलते अधिकांश कक्षाओं की किताबें अब तक स्कूलों तक नहीं पहुंच पाई हैं।[1][2] इस स्थिति के कारण छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और वे पुरानी किताबों से काम चलाने को मजबूर हैं।[1] त्रैमासिक परीक्षा सिर पर, कैसे पूरा होगा कोर्स? स्कूलों में किताबों की यह कमी शिक्षकों और अभिभावकों दोनों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है। लगभग डेढ़ महीने बाद त्रैमासिक परीक्षाएं होनी हैं, ऐसे में बिना नई किताबों के पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती है।[1] जिले के प्राइमरी से लेकर मिडिल स्कूलों तक में यही स्थिति है। उदाहरण के लिए, कक्षा 6वीं के छात्रों को सिर्फ गणित की किताब मिली है, जबकि 8वीं के छात्रों को भी कुछ ही विषयों की पुस्तकें प्राप्त हुई हैं।[1] नए पाठ्यक्रम के कारण पुरानी किताबों से पढ़ाई करना भी पूरी तरह संभव नहीं हो पा रहा है।[1] क्यों हुई किताबों के वितरण में देरी? इस साल किताबों के वितरण में देरी के कई कारण सामने आ रहे हैं: तकनीकी खामियां: इस वर्ष भ्रष्टाचार रोकने के लिए किताबों पर बारकोड लगाए गए हैं।[3][4] लेकिन पाठ्य पुस्तक निगम के पोर्टल का सर्वर बार-बार डाउन होने से स्कूलों में किताबों की स्कैनिंग और डेटा अपलोडिंग का काम अटक गया है, जिससे वितरण रुका हुआ है।[5][6] पुराने डेटा पर छपाई: किताबों की छपाई पुराने यू-डायस (UDISE) डेटा और पिछले साल के स्टॉक के आधार पर की गई। इसमें नए दाखिलों और छात्रों की बढ़ी हुई संख्या का अनुमान नहीं लगाया गया, जिससे कई स्कूलों में मांग के अनुरूप किताबें नहीं पहुंचीं।[1][2] वितरण में अव्यवस्था: पाठ्य पुस्तक निगम से स्कूलों तक किताबें पहुंचाने की प्रक्रिया में भी अव्यवस्था देखने को मिली है।[2][5] प्रशासन के दावों के बावजूद स्थिति जस की तस हालांकि, पाठ्य पुस्तक निगम और शिक्षा विभाग के अधिकारी जल्द ही किताबें पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।[2][5] स्कूल प्रबंधन द्वारा जिला कार्यालय को किताबों की मांग के लिए पत्र लिखे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।[1] इस लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर प्राइमरी और मिडिल स्कूल के मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। अभिभावकों और शिक्षकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द किताबों की व्यवस्था की जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई और भविष्य अधर में न लटके।[1]](https://nidarchhattisgarh.com/wp-content/uploads/2025/08/16a.jpg)