गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: सेखवा की 16 एकड़ जंगल मद जमीन के रिकॉर्ड पर गंभीर आरोप

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के सेखवा में बड़े झाड़ जंगल मद की करीब 16 एकड़ भूमि के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप। शिकायत 2023 की, जांच रिपोर्ट अब तक नहीं मिली।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की सकोला तहसील के ग्राम सेखवा में बड़े झाड़ जंगल मद की करीब 16 एकड़ भूमि को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ की शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि खसरा नंबर 1408 से जुड़ी इस जमीन के पुराने अभिलेखों में मध्यप्रदेश शासन का नाम दर्ज था, जिसे बाद में मिटाकर निजी नाम चढ़ा दिए गए।

शिकायत 29 दिसंबर 2023 को कलेक्टर कार्यालय में दी गई थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक जांच की बात सामने आई, लेकिन उसकी रिपोर्ट उन्हें आज तक नहीं मिली। यह भी आरोप है कि 2025 में इसी जमीन को बैंक में बंधक रखकर कर्ज लिया गया।
ये सभी बातें शिकायतकर्ता के दावे और आरोप हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि या संबंधित पक्षों का जवाब अभी सामने नहीं आया है।

क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, खसरा नंबर 1408 की भूमि पहले मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज थी और उसकी प्रकृति बड़े झाड़ जंगल मद की थी। आरोप है कि मूल मिशल में सफेद स्याही लगाकर शासन की प्रविष्टि हटाई गई और निजी भू-स्वामियों के नाम दर्ज कर दिए गए।
शिकायत के मुख्य बिंदु:

- स्थान: ग्राम सेखवा, तहसील सकोला, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
- खसरा नंबर: 1408
- खसरा 1408/1 का रकबा करीब 25.54 एकड़ बताया गया है
- आरोप है कि इसमें बदलाव कर 1408/1/2 के रूप में करीब 16.36 एकड़ अलग दिखाई गई और ईश्वरदीन व ददुवा के नाम जोड़े गए
- शिकायतकर्ता का दावा है कि उसके पास इसी जमीन के दो अलग-अलग मिशल हैं
पुराने रिकॉर्ड में क्या दर्ज बताया गया?
शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए दस्तावेजों के अनुसार:
- 1954-55 के अधिकार अभिलेख में खाता क्रमांक 344 की प्रविष्टियों में लाल स्याही से छेड़छाड़ का आरोप है
- 1989-90, 1994-95 और 1999-2000 के अभिलेखों में भूमि मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज होने का दावा किया गया है
इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। यह भी साफ नहीं है कि बाद में निजी नाम किस आदेश या प्रक्रिया से दर्ज हुए। शिकायतकर्ता ने पट्टे, शासन की अनुमति या वन व राजस्व विभाग की अनापत्ति जैसे सवाल उठाए हैं।
शिकायत और जांच रिपोर्ट का सवाल
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 29 दिसंबर 2023 की शिकायत में बिंदुवार आपत्तियां और दोनों मिशल की प्रतियां संलग्न थीं। बताया गया है कि शिकायत के बाद पटवारी स्तर पर जांच रिपोर्ट तैयार होने की जानकारी सामने आई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि RTI सहित अन्य माध्यमों से कोशिश के बावजूद यह रिपोर्ट उन्हें नहीं मिली। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष थे, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस पर प्रशासन का पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है।
बैंक में बंधक रखने का आरोप
आरोपों के अनुसार, वर्ष 2025 में इसी जमीन को बेमेतरा की एक बैंक शाखा में बंधक रखकर लाखों रुपये का कर्ज लिया गया। बैंक ने किन दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत किया, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। बैंक का पक्ष भी सामने नहीं आया है।
स्थानीय स्तर पर तत्कालीन कलेक्टर के पूर्व पदस्थापन (बेमेतरा में जिला पंचायत CEO) को लेकर चर्चाएं बताई गई हैं। लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रमाण उपलब्ध नहीं है, और किसी अधिकारी की संलिप्तता साबित नहीं होती। इस आधार पर किसी के विरुद्ध निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मौके पर वन विभाग का प्लांटेशन?
शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस भूमि को कागजों में निजी बताया जा रहा है, वहां वन विभाग का प्लांटेशन मौजूद है। साल के प्राकृतिक पेड़ और नीलगिरी के पौधारोपण का भी उल्लेख किया गया है। इसकी मौके पर स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जिन लोगों के नाम सामने आए
शिकायत में सेखवा निवासी बेबी लता और उनके पति शंकर प्रजापति का नाम सामने आया है। उन पर लगे आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के दावे हैं, और उनका पक्ष उपलब्ध नहीं है। बिना जांच और पुष्टि के किसी को दोषी नहीं कहा जा सकता।
शिकायतकर्ता की मांगें और आगे क्या?
शिकायतकर्ता और स्थानीय स्तर पर ये मांगें उठाई गई हैं:
- मूल मिशल और पुराने अभिलेखों की फोरेंसिक जांच
- राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम से मौका-जांच व सीमांकन
- 2023 की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करना
- जांच पूरी होने तक जमीन के हस्तांतरण और निर्माण पर रोक
- बैंक ऋण और बंधक से जुड़े दस्तावेजों की जांच
फिलहाल प्रशासन, संबंधित व्यक्तियों या बैंक की ओर से कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। जांच में दावे सही पाए जाते हैं या नहीं, यह आधिकारिक जांच से ही तय होगा।









