बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मेडिकल इंश्योरेंस से मिली राशि मुआवजे से नहीं होगी घटाई – मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मिलेगा पूरा हक

? बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मेडिकल इंश्योरेंस से मिली राशि मुआवजे से नहीं होगी घटाई – मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मिलेगा पूरा हक
⚖️ मोटर दुर्घटना मामलों में बड़ा निर्णय: मुआवजा घटाने के लिए नहीं काटी जाएगी मेडिक्लेम राशि
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट किया है कि दुर्घटना पीड़ित द्वारा मेडिक्लेम या मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत प्राप्त की गई राशि को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के अंतर्गत मिलने वाले मुआवजे से कम नहीं किया जा सकता।मेडिकल इंश्योरेंस से मिली राशि मुआवजे से नहीं होगी घटाई
यह फैसला न्यायमूर्ति गौरी गोडसे, मिलिंद एन. जाधव और ए.एस. चंदुरकर की तीन-न्यायाधीशों वाली खंडपीठ ने सुनाया।
? क्या था मामला?
मामला The New India Assurance Co. Ltd. v. Mrs. Dolly Satish Gandhi & Anr. से जुड़ा हुआ है। इसमें दावा किया गया था कि चूंकि पीड़िता को पहले ही मेडिक्लेम पॉलिसी से खर्च की भरपाई हो चुकी है, इसलिए ट्रिब्यूनल द्वारा मेडिकल खर्चों के नाम पर दी गई राशि अनुचित है।मेडिकल इंश्योरेंस से मिली राशि मुआवजे से नहीं होगी घटाई
हालांकि, पीड़िता ने पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि मेडिक्लेम के तहत मिली राशि को मुआवजे से कम नहीं किया जा सकता।मेडिकल इंश्योरेंस से मिली राशि मुआवजे से नहीं होगी घटाई
?⚖️ कोर्ट की गहन व्याख्या – दोहरा लाभ नहीं बल्कि अधिकार
कोर्ट ने Helen C. Rebello, Patricia Jean Mahajan और Sebastiani Lakra जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि –
“बीमा कंपनी से प्राप्त राशि एक निजी अनुबंध के तहत दी जाती है। यह लाभ पीड़ित की आर्थिक समझदारी और पूर्व निवेश का परिणाम है, जिसका फायदा टॉर्चफेसर (दोषी पक्ष) को नहीं दिया जा सकता।”मेडिकल इंश्योरेंस से मिली राशि मुआवजे से नहीं होगी घटाई
? कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
- “मेडिकल इंश्योरेंस से प्राप्त राशि मुआवजे से नहीं घटाई जा सकती।”
- “यह बीमा अनुबंध का लाभ है, न कि दुर्घटना का परिणाम।”
- “दोषी व्यक्ति को पीड़ित की सूझबूझ का लाभ नहीं मिलना चाहिए।”
- “यह कोई दोहरा लाभ नहीं, बल्कि वैध हक है।”
?⚖️ न्यायपालिका की स्पष्टता – गलत कानूनी व्याख्या को खारिज किया गया
कोर्ट ने पहले के कुछ निर्णयों (जैसे Dineshchandra Shantilal Shah) की वैधानिकता को सही कानूनी स्थिति के अनुरूप नहीं बताया और Sebastiani Lakra की मिसाल को सही और अंतिम बताया।मेडिकल इंश्योरेंस से मिली राशि मुआवजे से नहीं होगी घटाई
इस ऐतिहासिक फैसले के जरिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से बीमा पॉलिसी लेता है और दुर्घटना के बाद उसे क्लेम मिलता है, तो उस पर मुआवजा कम नहीं किया जा सकता। यह फैसला देश भर में दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।मेडिकल इंश्योरेंस से मिली राशि मुआवजे से नहीं होगी घटाई



















