सक्ती
13 साल का इंतज़ार, न्याय अब तक अधूरा: वेदांता पावर प्लांट के खिलाफ भू-विस्थापितों की हाईकोर्ट में लड़ाई

मामला क्या है?
- सक्ती जिले के सिंघीतराई गांव में 2008 में वेदांता पावर प्लांट के लिए 1000 एकड़ जमीन ली गई थी
- इस जमीन के बदले 800 से ज्यादा परिवारों को नौकरी और भत्ते का वादा किया गया था
- लेकिन 17 साल बाद भी 400 से ज्यादा परिवारों को न नौकरी मिली, न भत्ता
प्लांट की पूरी टाइमलाइन
- 2008 में जमीन अधिग्रहण हुआ
- 2013 में एथेना कंपनी के नाम से प्लांट शुरू हुआ
- 2016 में प्लांट बंद हो गया
- 2022 में वेदांता कंपनी ने इसे खरीद लिया
- 2025 में प्लांट फिर से चालू किया गया
अब हाईकोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?
- भू-विस्थापित परिवार 2021 में पहली बार हाईकोर्ट गए थे
- कोर्ट ने जिला प्रशासन को तुरंत समाधान निकालने का आदेश दिया था
- इसके बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ीं
- अब परिवारों ने अवमानना याचिका दायर कर दी है
याचिका में किसे बनाया गया पक्षकार?
- वेदांता कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल
- राजस्व सचिव शम्मी आबिदी
- सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो
- डभरा एसडीएम
प्रशासन का क्या कहना है?
- सक्ती कलेक्टर का कहना है कि प्रशासन समस्या सुलझाने की कोशिश कर रहा है
- लेकिन सवाल यह है कि 13 साल और दो कोर्ट आदेशों के बाद भी सिर्फ “कोशिश” ही क्यों हो रही है
आगे क्या होगा?
- अब इस मामले का फैसला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा
- तब तक सिंघीतराई के सैकड़ों परिवार न्याय के इंतज़ार में हैं
Read More:
WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!








