‘जीरो टॉलरेंस’ पर सवाल! महादेव ऐप विवाद के बीच चर्चित अफसरों को बड़ी पोस्टिंग, आखिर वजह क्या?

विशेष रिपोर्ट | रायपुर :छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वजह है 10 जुलाई 2026 को गृह विभाग की एक तबादला सूची, जिसमें दो आईपीएस अफसरों के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
किन अफसरों की हो रही है बात?
- आईपीएस अजय कुमार यादव को अब राजनांदगांव रेंज का IG बनाया गया है
- आईपीएस प्रशांत अग्रवाल को पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है
- दोनों अफसरों के नाम पहले भी महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स और ED की जांच में चर्चा में आ चुके हैं
- स्पष्ट रहे — किसी अदालत ने अब तक इन पर कोई दोष सिद्ध नहीं किया है, और दोनों अफसर आरोपों से इनकार करते रहे हैं
असली सवाल यह है
अगर सरकार भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई का दावा करती है, तो चर्चित नामों को इतने बड़े पदों पर क्यों भेजा गया? यही सवाल राजनीतिक हलकों से लेकर आम जनता तक उठाया जा रहा है।

महादेव ऐप मुद्दा: चुनाव में हथियार, अब कहां गया?
- चुनाव के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया था
- मंचों से बड़े-बड़े वादे किए गए — “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा”
- लेकिन सरकार बदलने के बाद कार्रवाई की रफ्तार और दिशा को लेकर सवाल बरकरार हैं
- अब तक स्पष्ट नहीं कि किस पर, क्या कार्रवाई हुई
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक फैसला है?
- सरकार का पक्ष हो सकता है कि यह सामान्य तबादला प्रक्रिया है
- किसी अफसर पर आरोप सिद्ध नहीं हुए, यह तर्क भी सही है
- लेकिन जब जांच अभी लंबित हो, तो संवेदनशील पदों से दूर रखना ज्यादा उचित नहीं होगा?
दोहरे मापदंड का आरोप
- विपक्ष में रहते हुए इसे “देश का सबसे बड़ा घोटाला” बताया गया था
- सत्ता में आने के बाद अब यही मुद्दा शांत क्यों पड़ गया?
- क्या बड़े अफसरों के मामलों में सरकार का नजरिया अलग होता है?
जनता के मन में उठ रहे सवाल
- क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक सीमित है?
- क्या महादेव ऐप मामले में बड़े नामों पर कार्रवाई की फाइल बंद हो चुकी है?
- क्या ऐसे फैसलों से ईमानदार अफसरों का मनोबल प्रभावित नहीं होगा?
यह रिपोर्ट किसी को दोषी नहीं ठहराती। सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना लोकतंत्र में मीडिया की जिम्मेदारी है। अगर सरकार के पास इन नियुक्तियों को लेकर कोई स्पष्ट जवाब या जांच की स्थिति है, तो उसे सामने आना चाहिए — क्योंकि यह सवाल सिर्फ दो अफसरों का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का है।










