सुकमा में शिक्षा पर चला प्रशासन का हंटर: डिप्टी कलेक्टर के औचक निरीक्षण में नशे में मिला टीचर, 5 को कारण बताओ नोटिस जारी

सुकमा में शिक्षा पर चला प्रशासन का हंटर: डिप्टी कलेक्टर के औचक निरीक्षण में नशे में मिला टीचर, 5 को कारण बताओ नोटिस जारी
सुकमा में शिक्षा पर चला प्रशासन का हंटर, छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देश पर डिप्टी कलेक्टर निधि प्रधान ने स्कूलों और आश्रम शालाओं का औचक निरीक्षण किया, जिसमें शिक्षकों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। एक शिक्षक जहां स्कूल परिसर में नशे की हालत में पाया गया, वहीं कई अन्य बिना सूचना के नदारद मिले। इस पर कार्रवाई करते हुए 5 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
नशे में धुत्त शिक्षक, बिना बताए गायब प्राचार्य
निरीक्षण के दौरान डिप्टी कलेक्टर ने जो पाया, वह हैरान करने वाला था।
बालक आश्रम, पाकेला: यहां सहायक शिक्षक अशोक ठाकुर 23 जुलाई को स्कूल परिसर में ही नशे की हालत में पाए गए। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का घोर उल्लंघन मानते हुए बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना गया है।
हाई स्कूल, कोर्रा: यहां के प्रभारी प्राचार्य बाबूलाल नाग 22 जुलाई को बिना किसी पूर्व सूचना या अवकाश आवेदन के स्कूल से अनुपस्थित पाए गए, जिससे स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।
एक ही आश्रम से प्रधान पाठक समेत तीन शिक्षक मिले नदारद
शासकीय कन्या आश्रम शाला, हिकमीरास में तो लापरवाही की हद ही पार हो गई।
14 जुलाई को हुए निरीक्षण में सहायक शिक्षक संगीता नाग और शिक्षक आर.के. बिसी बिना किसी सक्षम अनुमति के अनुपस्थित मिले।
इसी आश्रम के प्रधान पाठक दिलीप सिंह ठाकुर 10 जुलाई से 14 जुलाई तक लगातार पांच दिनों तक स्कूल से गायब रहे।
कलेक्टर की दो टूक: लापरवाही बर्दाश्त नहीं, दो दिन में दें जवाब
इन मामलों के सामने आने के बाद कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शैक्षणिक कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।सुकमा में शिक्षा पर चला प्रशासन का हंटर
फिलहाल, इन सभी पांच शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।सुकमा में शिक्षा पर चला प्रशासन का हंटर



















