अमेरा कोल माइंस विवाद: ASP और कलेक्टर पर हमले के बाद पुलिस का सख्त एक्शन, 150 ग्रामीणों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज
खदान विस्तार के विरोध में भड़की हिंसा में 39 अधिकारी-कर्मचारी हुए थे घायल; पुलिस ने 55 को नामजद किया, जवाबी कार्रवाई में लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग।

सरगुजा: अमेरा कोल माइंस (Amera Coal Mines) विस्तार परियोजना को लेकर चल रहा विवाद अब हिंसक रूप ले चुका है। ग्रामीणों द्वारा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर किए गए जानलेवा हमले के बाद पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। लखनपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 150 ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। इस हिंसक झड़प में एएसपी (ASP) और अपर कलेक्टर समेत 39 सरकारी कर्मचारी घायल हुए थे।
पुलिस ने दर्ज मामले में ‘हत्या के प्रयास’ जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। कुल 150 आरोपियों में से 55 ग्रामीणों की पहचान कर उन्हें नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि अन्य की पहचान प्रक्रिया जारी है।ASP और कलेक्टर पर हमले के बाद पुलिस का सख्त एक्शन, 150 ग्रामीणों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज
सुनियोजित था हमला? गुलेल और लाठी-डंडों से वार
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, खदान विस्तार का विरोध कर रही भीड़ अचानक उग्र हो गई। ग्रामीणों ने लाठी, डंडे, पत्थर और गुलेल जैसी हथियारनुमा वस्तुओं से लैस होकर प्रशासनिक अमले पर धावा बोल दिया। यह हमला इतना तीखा था कि मौके पर मौजूद पुलिस बल और अधिकारियों को संभलने का मौका नहीं मिला। इस हमले में एएसपी, अपर कलेक्टर और पुलिस इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों समेत कुल 39 लोग घायल हुए हैं, जिनका उपचार कराया जा रहा है।ASP और कलेक्टर पर हमले के बाद पुलिस का सख्त एक्शन, 150 ग्रामीणों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
हिंसा और कानून व्यवस्था को हाथ में लेने के आरोप में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। लखनपुर पुलिस द्वारा दर्ज FIR में निम्नलिखित आरोप शामिल हैं:
हत्या का प्रयास: अधिकारियों पर जानलेवा हमले को देखते हुए।
शासकीय कार्य में बाधा: प्रशासन की कार्रवाई को रोकने के लिए।
शासकीय संपत्ति को नुकसान: वाहनों और उपकरणों में तोड़फोड़।
भीड़ हिंसा (Rioting): अवैध जमावड़ा और उपद्रव।
खतरनाक हथियारों का उपयोग: गुलेल और पत्थरों से चोट पहुँचाना।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई: आंसू गैस और लाठीचार्ज
हालात को बेकाबू होता देख और पुलिसकर्मियों की जान पर बन आने पर सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की। उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।ASP और कलेक्टर पर हमले के बाद पुलिस का सख्त एक्शन, 150 ग्रामीणों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज
आखिर क्यों उग्र हुए ग्रामीण? (विवाद की जड़)
अमेरा कोल एक्सटेंशन खदान विवाद का मुख्य कारण ‘जमीन और अस्तित्व’ की लड़ाई है।
ग्रामीणों का पक्ष: स्थानीय लोगों का आरोप है कि खदान के विस्तार से उनकी उपजाऊ खेती की जमीन छिन जाएगी, जलस्रोत सूख जाएंगे और गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। वे अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं।
प्रशासन का पक्ष: वहीं, प्रशासन और सरकार का तर्क है कि इस परियोजना से क्षेत्र में विकास होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास योजनाएं प्रदान करने का आश्वासन भी दिया है, लेकिन ग्रामीण इस पर सहमत नहीं हैं।
फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है।ASP और कलेक्टर पर हमले के बाद पुलिस का सख्त एक्शन, 150 ग्रामीणों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज



















