LIVE UPDATE
अपराधदिल्ली

Delhi High Court Verdict: ‘रात को सोते समय दरिंदगी करता है सौतेला पिता’: 12 साल की बच्ची की आपबीती पर दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Delhi High Court Verdict: ‘रात को सोते समय दरिंदगी करता है सौतेला पिता’: 12 साल की बच्ची की आपबीती पर दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सौतेली बेटी के साथ यौन उत्पीड़न के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए समाज और न्यायपालिका के सामने एक बड़ी मिसाल पेश की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि कोई नाबालिग पीड़िता पारिवारिक दबाव या मजबूरी में अपने बयान से पलट भी जाए, तो भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अदालत ने आरोपी पिता की 20 साल की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।

बच्ची का मुकर जाना ‘अस्वाभाविक’ नहीं: हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

Delhi High Court Verdict:न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बच्चों की मानसिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि कई बार नाबालिग बच्चे अपने ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे घर खोने, आर्थिक तंगी और सामाजिक बहिष्कार के डर से खुद को असहाय महसूस करते हैं।

WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!

Delhi High Court Verdict:अदालत ने तर्क दिया कि यदि आरोपी ही घर का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति हो, तो बच्ची पर सच छिपाने का भारी मानसिक दबाव होता है। ऐसे में अगर पीड़िता बाद में अपने बयान बदल लेती है, तो इसे उसकी इच्छा नहीं बल्कि उसकी ‘मजबूरी’ माना जाना चाहिए।

वैज्ञानिक सबूतों के सामने फेल हुए ‘बदले हुए बयान’

Delhi High Court Verdict:इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ तब आया जब ट्रायल के दौरान पीड़िता, उसकी माँ और उसकी बहन अपने शुरुआती बयानों से मुकर गए। आरोपी ने इसी आधार पर जमानत की मांग की थी। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल बयानों के बदलने से POCSO (पॉक्सो) एक्ट के तहत मामला खत्म नहीं हो जाता। कोर्ट के अनुसार, जब मामले में पुख्ता ‘वैज्ञानिक साक्ष्य’ (Scientific Evidence) मौजूद हों, तो मौखिक बयानों के बदलने का महत्व कम हो जाता है।

क्यों सख्त है दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश?

Delhi High Court Verdict:अदालत ने अपने आदेश में कुछ मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया है, जो भविष्य के मामलों के लिए नजीर बनेंगे:

  1. पारिवारिक दबाव: बच्चों पर यह जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती कि वे अपने सगे-संबंधियों को बचाने के लिए सच का बोझ उठाएं।

  2. आर्थिक निर्भरता: आरोपी पर आर्थिक निर्भरता अक्सर पीड़ित को चुप रहने पर मजबूर कर देती है।

  3. न्याय की प्राथमिकता: तकनीकी आधार पर या गवाहों के मुकरने पर गंभीर अपराधों में छूट नहीं दी जा सकती।

क्या था पूरा मामला?

Delhi High Court Verdict:यह मामला एक 12 साल की नाबालिग बच्ची से जुड़ा है, जिसने अपने सौतेले पिता पर रात के समय यौन उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगाया था। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इसी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ उसे कोई राहत नहीं मिली।

Pooja Chandrakar

देश में तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार वेबसाइट है। जो हिंदी न्यूज साइटों में सबसे अधिक विश्वसनीय, प्रमाणिक और निष्पक्ष समाचार अपने पाठक वर्ग तक पहुंचाती है। इसकी प्रतिबद्ध ऑनलाइन संपादकीय टीम हर रोज विशेष और विस्तृत कंटेंट देती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP Radio
WP Radio
OFFLINE LIVE