छत्तीसगढ़ के कोरियाई किसानों ने पेश की जल संरक्षण की अनूठी मिसाल, पीएम मोदी ने की सराहना

छत्तीसगढ़ के कोरियाई किसानों ने पेश की जल संरक्षण की अनूठी मिसाल,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देश को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के किसानों के जज्बे को सलाम किया है। पीएम मोदी ने कोरिया जिले में जल संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे अभिनव प्रयासों की तारीफ करते हुए इसे पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बताया।
ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए किसानों का ‘कोरिया मॉडल’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से जिक्र किया कि कोरिया जिले के किसानों ने भूजल स्तर (Ground Water) को बढ़ाने के लिए एक बेहद सरल और प्रभावी तरीका खोज निकाला है। इन किसानों ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा का बीड़ा उठाया है।
छत्तीसगढ़ के कोरियाई किसानों ने पेश की जल संरक्षण की अनूठी मिसाल,किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे ‘रिचार्ज तालाब’ और ‘सोखता गड्ढे’ तैयार किए हैं। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि मानसून के दौरान होने वाली बारिश का पानी बहकर बर्बाद नहीं होता, बल्कि इन गड्ढों के माध्यम से धीरे-धीरे जमीन के अंदर समाहित हो जाता है। इससे मिट्टी की नमी बनी रहती है और जल स्तर में भी सुधार होता है।
1200 से अधिक किसानों ने बदली गांव की तस्वीर
इस मुहिम की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को सफलतापूर्वक अपना चुके हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस छोटे से बदलाव ने बड़े परिणाम देने शुरू कर दिए हैं। जिन इलाकों में पहले पानी की किल्लत रहती थी, वहां अब भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पीएम ने इसे सामुदायिक भागीदारी और इच्छाशक्ति का बेहतरीन उदाहरण बताया।
मन की बात: 132वां एपिसोड और जन-संवाद की ताकत
रविवार सुबह 11 बजे आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम का यह 132वां एपिसोड था। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने न केवल देश बल्कि विदेश के श्रोताओं के साथ भी अपने विचार साझा किए। वर्ष 2026 के इस तीसरे प्रसारण में प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर दिया।
छत्तीसगढ़ के कोरियाई किसानों ने पेश की जल संरक्षण की अनूठी मिसाल,’मन की बात’ मंच के माध्यम से प्रधानमंत्री लगातार देश के विभिन्न कोनों में हो रहे सकारात्मक बदलावों को दुनिया के सामने लाते हैं, और कोरिया के किसानों की यह कहानी निश्चित रूप से अन्य राज्यों के अन्नदाताओं को भी जल संरक्षण की दिशा में प्रोत्साहित करेगी।



















