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अपराधमध्यप्रदेश

MP News: धनकुबेर पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर ED का बड़ा खुलासा, जांच एजेंसी की एक गलती ने बदली थी पूरी बाजी

MP News: धनकुबेर पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर ED का बड़ा खुलासा,मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आरटीओ (RTO) के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की काली कमाई के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी ताजा सालाना लीगल रिपोर्ट में लोकायुक्त पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी की एक तकनीकी चूक के कारण करोड़ों के इस घोटाले के मुख्य आरोपी को कानूनी राहत मिल गई थी।

लोकायुक्त की सुस्ती और ‘डिफ़ॉल्ट जमानत’ का खेल

ED की वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भ्रष्टाचार के इस गंभीर मामले में लोकायुक्त पुलिस निर्धारित समय सीमा के भीतर चार्जशीट (आरोप-पत्र) दाखिल करने में विफल रही। इसी लापरवाही का फायदा उठाते हुए आरोपी सौरभ शर्मा को 1 अप्रैल को ‘डिफ़ॉल्ट जमानत’ (Default Bail) मिल गई थी। हालांकि, ED की सक्रियता और सख्त जांच के चलते वह जेल से बाहर नहीं आ सका।

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108 करोड़ की ‘क्रिमिनल इनकम’ का खुलासा

ED ने अपनी लीगल रिपोर्ट में सौरभ शर्मा की आय को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। जांच में सामने आया है कि:

  • आरोपी ने शेल कंपनियों, फर्जी लोन और जटिल वित्तीय लेनदेन के जरिए लगभग 108 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जुटाई।

  • आय के वास्तविक स्रोतों को छिपाने के लिए बड़ी मात्रा में नकदी को इधर-उधर (Money Laundering) किया गया।

  • फर्जी संस्थाओं और बिचौलियों का एक संगठित नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसका प्रबंधन सौरभ स्वयं कर रहा था।

हाईकोर्ट ने खारिज की नियमित जमानत याचिका

MP News: धनकुबेर पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर ED का बड़ा खुलासा,मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 सितंबर 2025 को सौरभ शर्मा की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी PMLA की धारा 45 की दोहरी शर्तों को पूरा करने में विफल रहा है। साक्ष्यों और सह-आरोपियों के बयानों से यह स्पष्ट है कि अपराध की कमाई और धनशोधन (Money Laundering) के बीच सीधा संबंध है।

क्या था पूरा मामला? (52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश)

यह मामला दिसंबर 2024 में तब सुर्खियों में आया जब लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के दौरान जो बरामदगी हुई, उसने सबके होश उड़ा दिए:

  1. छापेमारी: अरेरा कॉलोनी स्थित ठिकानों से करोड़ों की नकदी और अचल संपत्ति के दस्तावेज मिले।

  2. कार में खजाना: राजधानी के मेंडोरी इलाके में एक इनोवा कार से 51.8 किलोग्राम सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।

  3. गिरफ्तारी: इस बरामदगी के बाद आयकर विभाग और ED ने कार्रवाई की। ED ने सौरभ शर्मा के साथ उसके साथियों चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को भी गिरफ्तार किया।

जांच प्रक्रिया पर उठते सवाल

MP News: धनकुबेर पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर ED का बड़ा खुलासा,ED के इस खुलासे ने राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक इकाइयों की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान लगा दिया है। समय पर कार्रवाई न होना किस तरह अपराधियों के लिए कानूनी कवच बन सकता है, सौरभ शर्मा का केस इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। फिलहाल, आरोपी सलाखों के पीछे है और ED ने उसकी 108 करोड़ की संपत्ति को ‘अपराध की आय’ घोषित कर जब्त कर रखा है।

Expert Insight: क्या होती है डिफ़ॉल्ट जमानत?

कानून के जानकारों के अनुसार, जब जांच एजेंसी गिरफ्तारी के बाद तय समय (आमतौर पर 60 या 90 दिन) के भीतर कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल नहीं कर पाती, तो आरोपी को रिहा करने का कानूनी प्रावधान है, जिसे डिफ़ॉल्ट जमानत कहा जाता है। सौरभ शर्मा के मामले में इसी तकनीकी पहलू का लाभ उठाया गया था।

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Pooja Chandrakar

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