कुएं से निकलते ही गांव में घुसा तेंदुआ, रेस्क्यू के दौरान मची भारी अफरा-तफरी

कुएं से निकलते ही गांव में घुसा तेंदुआ,छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के जगतरा गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक तेंदुए को कुएं से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी। रेस्क्यू के दौरान जैसे ही तेंदुआ बाहर आया, वह जंगल की ओर जाने के बजाय सीधे रिहायशी इलाके की ओर दौड़ पड़ा। तेंदुए को अपनी ओर आता देख ग्रामीणों में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया।
जान बचाने के लिए तालाब में कूदे ग्रामीण
तेंदुए के अचानक हमले के डर से लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। स्थिति इतनी भयावह थी कि डर के मारे कुछ ग्रामीणों ने पास के तालाब में छलांग लगा दी। तेंदुए की मौजूदगी ने पूरे गांव को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है।
खाट और जेसीबी का देसी जुगाड़ पड़ा भारी
कुएं से निकलते ही गांव में घुसा तेंदुआ,बताया जा रहा है कि वन विभाग की टीम ने तेंदुए को बाहर निकालने के लिए जेसीबी मशीन और खाट का सहारा लिया था। तेंदुआ घंटों से कुएं के भीतर फंसा हुआ था। जैसे ही उसे खाट के जरिए ऊपर खींचा गया, उसने मौका पाकर एक लंबी छलांग लगाई और सीधे बस्ती की ओर भाग निकला।
वन विभाग की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने वन विभाग की रेस्क्यू रणनीति पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन्यजीव को बिना ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किए बाहर निकालना एक बड़ी लापरवाही थी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि तेंदुए को पहले बेहोश कर दिया जाता, तो ग्रामीणों की जान जोखिम में नहीं पड़ती। फिलहाल, महिलाएं और बच्चे इस घटना के बाद गहरे सदमे में हैं।
सर्च ऑपरेशन जारी: अलर्ट पर जगतरा गांव
कुएं से निकलते ही गांव में घुसा तेंदुआ,तेंदुए के भागने के तुरंत बाद वन अमला उसकी तलाश में जुट गया है। आस-पास के खेतों और झाड़ियों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वन विभाग ने एहतियात के तौर पर ग्रामीणों को घरों के भीतर रहने और अकेले बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी है। आशंका जताई जा रही है कि तेंदुआ रिहायशी इलाका छोड़कर पास के घने जंगल में छिप गया है।
जंगलों में पानी की कमी बनी बड़ी वजह
कुएं से निकलते ही गांव में घुसा तेंदुआ,गर्मी के मौसम की शुरुआत होते ही जंगलों में जल स्रोतों का सूखना वन्यजीवों के गांवों की ओर पलायन का मुख्य कारण बन रहा है। पानी की तलाश में ये शिकारी जानवर अक्सर कुओं में गिर जाते हैं या इंसानी बस्तियों के करीब पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।









