RTE एडमिशन में देरी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की तल्खी: राज्य सरकार को विस्तृत डेटा पेश करने के निर्देश

RTE एडमिशन में देरी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की तल्खी:छत्तीसगढ़ में ‘शिक्षा के अधिकार’ (RTE) के माध्यम से निजी स्कूलों की कक्षा पहली में होने वाले दाखिलों की सुस्त रफ्तार ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य प्रशासन को फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार के हलफनामे से असंतुष्ट दिखा कोर्ट
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक हलफनामा पेश किया गया था। हालांकि, माननीय न्यायालय ने इस रिपोर्ट को अधूरा और असंतोषजनक माना। कोर्ट ने सरकार द्वारा दी गई जानकारियों की स्पष्टता पर नाराजगी जाहिर की और अब एक नए, विस्तृत शपथ पत्र की मांग की है।
हाईकोर्ट ने मांगी स्कूल-वार जानकारी
RTE एडमिशन में देरी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की तल्खी:अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि आगामी शपथ पत्र में निम्नलिखित बिंदुओं का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए:
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स्कूलों की सूची: राज्य के किन-किन निजी स्कूलों में कितनी सीटें RTE के तहत आरक्षित हैं।
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प्रवेश का विवरण: अब तक कुल कितनी सीटों पर बच्चों का दाखिला सुनिश्चित हो चुका है।
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छात्रों का डेटा: किन बच्चों को किन स्कूलों में प्रवेश मिला है, इसकी पूरी पारदर्शी जानकारी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह हस्तक्षेप?
हर साल हजारों गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे RTE के तहत अच्छे स्कूलों में पढ़ने का सपना देखते हैं। प्रक्रिया में देरी होने से न केवल उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित होता है, बल्कि कई बार सीटें खाली रह जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों पर एडमिशन प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने का दबाव बढ़ेगा।
RTE एडमिशन में देरी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की तल्खी:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह कदम उन अभिभावकों के लिए उम्मीद की किरण है जो अपने बच्चों के दाखिले के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। अब देखना यह है कि राज्य सरकार अगले हलफनामे में क्या ठोस आंकड़े पेश करती है।









