बस्तर के जंगलों में लौटी रौनक: नक्सलवाद के खात्मे के साथ वन विभाग ने संभाला मोर्चा

बस्तर के जंगलों में लौटी रौनक:बस्तर संभाग के उन दुर्गम इलाकों में, जहाँ कभी बंदूकों की गूँज सुनाई देती थी, अब विकास और संरक्षण की सुगबुगाहट तेज हो गई है। नक्सलवाद के प्रभाव में आई कमी के बाद छत्तीसगढ़ वन विभाग ने अब उन संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी पहुँच बना ली है, जिन्हें दशकों से ‘नो-गो जोन’ माना जाता था।
24 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वन रक्षकों की बढ़ी सक्रियता
बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और तुलसी डोंगरी जैसे इलाकों में अब वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी निर्भीक होकर प्रवेश कर रहे हैं। आँकड़ों के अनुसार, लगभग 24,000 हेक्टेयर का विशाल वन क्षेत्र, जो पहले नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था, अब वन कर्मियों की निगरानी में है। डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड अब सुरक्षा बलों के साथ मिलकर इन घने जंगलों में नियमित सर्चिंग और गश्त कर रहे हैं।
अवैध शिकार और वन कटाई पर लगेगी लगाम
जगदलपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (CCF) आलोक कुमार तिवारी के अनुसार, हाल ही में पदोन्नत हुए 12 डिप्टी रेंजरों को विशेष रूप से बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा के अंदरूनी क्षेत्रों में तैनात किया गया है।
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मुख्य उद्देश्य: वनों की अवैध कटाई को रोकना।
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वन्यजीव संरक्षण: दुर्लभ वन्य जीवों के शिकार पर कड़ाई से रोक लगाना।
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अवैध परिवहन: लकड़ी और अन्य वन संसाधनों की तस्करी को पूरी तरह समाप्त करना।
ग्रामीणों की भागीदारी और आत्मनिर्भरता पर जोर
बस्तर के जंगलों में लौटी रौनक:वन विभाग केवल गश्त तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह स्थानीय आदिवासियों के जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास भी कर रहा है। विभाग अब ग्रामीणों के साथ मिलकर लघु वनोपज (Minor Forest Produce) के संग्रहण और उनके वैज्ञानिक संरक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इससे न केवल वनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
विभागीय पहुँच का जिलावार विवरण
बस्तर संभाग के विभिन्न वन मंडलों में अब विभाग की सक्रियता कुछ इस प्रकार है:
| वन मंडल | कुल क्षेत्रफल (लाख हे.) | पुनः नियंत्रण में आया क्षेत्र (हेक्टेयर) |
| बस्तर | 3.58 | 6,000 |
| बीजापुर | 3.53 | 6,000 |
| दंतेवाड़ा | 1.27 | 6,000 |
| सुकमा | 3.44 | 6,000 |
दहशत के साये से बाहर निकलता बस्तर
बस्तर के जंगलों में लौटी रौनक:एक समय था जब पदस्थ अधिकारी दहशत के कारण इन क्षेत्रों में जाने से कतराते थे, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित होने और नक्सली गतिविधियों के सिमटने से सरकारी योजनाओं का लाभ अब सीधे बस्तर के दूरस्थ अंचलों तक पहुँच रहा है। वन विभाग की यह सक्रियता पर्यावरण संरक्षण और बस्तर के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।









