
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में घरेलू विवाद में पिता की हत्या करने वाले आरोपी बेटे को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जानिए पूरा मामला।
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मामूली घरेलू विवाद ने एक बेटे को हत्यारा बना दिया। पुरुर थाना क्षेत्र में पिता की जान लेने वाले आरोपी बेटे को अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत का यह सख्त फैसला न्याय प्रक्रिया में मजबूत साक्ष्यों और पुलिस की मुस्तैदी का परिणाम है।

यह पूरी घटना वर्ष 2025 की है, जब एक परिवार के भीतर उपजा आपसी तनाव खूनी संघर्ष में बदल गया। पुलिस जांच के अनुसार, मामूली बात पर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि बेटे ने अपने ही पिता पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही गंभीर चोटों के कारण जान चली गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को कानून के कटघरे में खड़ा किया, जिस पर अब न्यायपालिका ने अंतिम मुहर लगा दी है।
घरेलू विवाद से उपजा था खूनी संघर्ष
पुरुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सामने आए इस पारिवारिक विवाद ने विकृत रूप ले लिया, जब यशपाल सोरी का अपने पिता लचमु सोरी के साथ किसी घरेलू बात पर झगड़ा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, बहस इतनी बढ़ गई कि आरोपी बेटे ने नियंत्रण खो दिया। उसने न केवल पिता के साथ गाली-गलौज की, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी और गुस्से में आकर मारपीट पर उतर आया।

मारपीट के बाद हुई थी पिता की मौत
अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और पुलिस बयानों के अनुसार, आरोपी बेटे ने चप्पल से अपने बुजुर्ग पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की। इस हिंसक हमले में लचमु सोरी को अंदरूनी और गंभीर चोटें आईं, जो अंततः उनकी मौत का कारण बनीं। घटना के बाद परिवार और इलाके में सनसनी फैल गई थी, जिसके तुरंत बाद पुलिस को मामले की सूचना दी गई।
पुलिस जांच और साक्ष्यों की भूमिका
घटना की सूचना मिलते ही पुरुर पुलिस हरकत में आई और तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 94/2025 दर्ज किया और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई। विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और तमाम भौतिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्र किए, जो कोर्ट में केस को मजबूत करने के लिए अहम साबित हुए।

अदालत का फैसला और सजा
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिस द्वारा जुटाए गए सभी ठोस सबूतों और तथ्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखा। इस मामले में शासन की ओर से शासकीय अभिभाषक तोमन साहू ने प्रभावी पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावलियों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद सत्र न्यायालय ने आरोपी यशपाल सोरी को पिता की हत्या का दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।









