आसाराम की गिरफ्तारी पर IPS अजयपाल लांबा की किताब में क्या लिखा है?

पैरोल पर रिहा आसाराम फिर चर्चा में है। IPS अजयपाल लांबा ने अपनी किताब में 2013 की गिरफ्तारी और पूछताछ का ब्योरा दिया है। जानिए किताब के दावे।
दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को पैरोल पर जेल से रिहा किया गया है। बाहर आने के बाद उसने पहले अपनी मेडिकल जांच कराई और फिर जोधपुर के आश्रम पहुंचा। इसी बीच राजस्थान कैडर के IPS अधिकारी अजयपाल लांबा की किताब एक बार फिर चर्चा में है।

लांबा 2013 में उस पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे थे, जिसने आसाराम को इंदौर से गिरफ्तार किया था। अपनी किताब में उन्होंने गिरफ्तारी और पूछताछ का ब्योरा दिया है। यहां बताई गई बातें किताब में लेखक के दावे हैं।
कौन सी है यह किताब?
किताब का नाम “Gunning for the Godman: The True Story Behind Asaram Bapu’s Conviction” है।

- प्रकाशक: हार्परकॉलिंस
- प्रकाशन: करीब 6 साल पहले
- लेखन में सहयोग: अरविंद माथुर
- लेखक: अजयपाल लांबा, जो केस के समय जोधपुर पश्चिम के डीसीपी थे
गिरफ्तारी से पहले दबाव के दावे
किताब के मुताबिक आसाराम ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हर तरह का दबाव डलवाने की कोशिश की। लांबा ने लिखा है कि उसने खुद को बचाने के लिए “साम, दाम, दंड, भेद” का हर तरीका अपनाया। इसके बावजूद पुलिस टीम पीछे नहीं हटी और समर्थकों के भारी विरोध के बीच आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ का वह किस्सा
लांबा के अनुसार, सख्ती से पूछताछ के बाद ही आसाराम के तेवर नरम पड़े। उन्होंने लिखा है कि उन्होंने कड़े लहजे में पूछा कि “बाबा तू तो ये बता कि तूने क्या किया”। किताब के अनुसार इस पर आसाराम घबरा गया और धीमी आवाज में बोला कि उससे “गलती हो गई”।

ध्यान रहे कि यह प्रसंग किताब में लेखक के बयान के रूप में दर्ज है। आसाराम को अदालत ने दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अब क्यों हो रही है चर्चा?
आसाराम की पैरोल पर रिहाई के बाद उसके आश्रम पहुंचने की खबरों से यह मामला फिर सुर्खियों में है। इसी कारण गिरफ्तारी के समय की घटनाओं पर लिखी गई यह किताब भी दोबारा चर्चा में आई।









