आईएएस शिखर अग्रवाल के बाद आईपीएस प्रशाखा माथुर भी एपीओ, विला खरीद-लीज मामले में कार्रवाई

राजस्थान कार्मिक विभाग ने आईपीएस डॉ. प्रशाखा माथुर को एपीओ किया। रिपोर्टों के अनुसार मामला विला-कॉटेज की खरीद और लीज से जुड़ा है, एसीबी की पीई दर्ज बताई जा रही है।
राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में एक और बड़ा फेरबदल सामने आया है। कार्मिक विभाग ने आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को एपीओ (अपॉइंटमेंट प्रतीक्षित आदेश) कर दिया है। इससे पहले उनके पति, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को भी एपीओ किया जा चुका है।

सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह पूरा मामला एक निजी कंपनी से कथित तौर पर कम कीमत पर बड़ी संख्या में कॉटेज और लग्जरी विला खरीदने और बाद में उसी कंपनी को लीज पर देने के आरोपों से जुड़ा है। ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और किसी की भी दोषसिद्धि साबित नहीं हुई है।
एपीओ एक प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसमें अधिकारी को नई पोस्टिंग मिलने तक किसी पद पर नियुक्त नहीं रखा जाता। इसे अपने आप में दंड या दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माना जाता।

क्या है पूरा मामला?
रिपोर्टों में किए गए दावों के मुताबिक:
- आरोप है कि बीते कुछ वर्षों में अलवर के अजबगढ़ और उदयपुर के बुझड़ा में करीब 40 लग्जरी विला और कॉटेज खरीदे गए।
- ये संपत्तियां कथित तौर पर इस दंपती, उनके बेटों और अन्य परिजनों के नाम पर ली गईं।
- आरोप है कि इन्हें एक निजी कंपनी से कम कीमत पर खरीदा गया और फिर उसी कंपनी को भारी राशि पर लीज पर दे दिया गया।
ये सभी बातें सूत्रों और रिपोर्टों पर आधारित आरोप हैं। संपत्तियों की वास्तविक कीमत, लीज की रकम और खरीद की शर्तों को लेकर आधिकारिक आंकड़े फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं।

एसीबी की भूमिका
रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने हाल ही में प्रिलिमिनरी इंक्वायरी (पीई) दर्ज की है। पीई जांच का शुरुआती चरण होता है, जिसमें यह देखा जाता है कि प्राथमिक तथ्यों के आधार पर आगे एफआईआर या औपचारिक जांच का आधार बनता है या नहीं।
अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के संकेत भी बताए जा रहे हैं, लेकिन इस पर एसीबी या सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
प्रशाखा माथुर का नाम कैसे जुड़ा?
चर्चा है कि इन करीब 40 संपत्तियों में से कुछ आईपीएस प्रशाखा माथुर के नाम पर संयुक्त या व्यक्तिगत रूप से दर्ज हैं। इसी वजह से प्रशासनिक हलकों में अनुमान लगाया जा रहा था कि जांच का दायरा उन तक भी पहुंच सकता है।
यह भी साफ है कि संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर यह जानकारी अभी चर्चा और रिपोर्टों के स्तर पर है। दस्तावेजी पुष्टि या अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।
किस पर असर पड़ेगा?
- दोनों अधिकारी: एपीओ के बाद उन्हें फिलहाल कोई विभागीय जिम्मेदारी नहीं है। आगे की पोस्टिंग जांच और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी।
- प्रशासनिक व्यवस्था: एक ही परिवार के दो वरिष्ठ अधिकारियों के एपीओ होने से इस मामले पर नजर बनी हुई है।
- जांच प्रक्रिया: एसीबी की पीई के नतीजों से तय होगा कि मामला औपचारिक कार्रवाई की ओर बढ़ेगा या नहीं।
आगे क्या होगा?
अब निगाहें एसीबी की जांच रिपोर्ट पर रहेंगी। पीई में अगर प्रथम दृष्टया तथ्य पाए जाते हैं तो आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है, अन्यथा मामला बंद भी हो सकता है। फिलहाल यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि जांच किस दिशा में जाएगी।
दोनों अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।









