
क्या है पूरा मामला?
- छत्तीसगढ़ में असली पनीर के नाम पर एनालॉग पनीर (नकली पनीर) बेचा जा रहा था
- होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट में ग्राहकों से असली पनीर का पैसा वसूला जाता था
- एक पड़ताल में पता चला कि यह कारोबार 500 करोड़ रुपये महीने तक पहुंच गया था
- सिर्फ रायपुर शहर में ही यह कारोबार 40-50 करोड़ रुपये महीने का था
नकली पनीर कैसे बनता है?
- इसे बनाने में वनस्पति तेल, स्टार्च और मिल्क सॉलिड का इस्तेमाल होता है
- असली पनीर से इसकी लागत बहुत कम होती है
- लेकिन इसे असली पनीर के भाव पर बेचा जाता है
- एक किलो नकली पनीर बेचकर 1,500 रुपये तक कमाए जा सकते हैं
- भाठागांव की एक फैक्ट्री पर छापे के बाद यह पूरा खेल सामने आया
किन शहरों में फैला है यह कारोबार?
- रायपुर के अलावा इन जिलों में भी नकली पनीर बिक रहा था:
- दुर्ग-भिलाई
- राजनांदगांव
- बिलासपुर
- रायगढ़
- कोरबा
- जगदलपुर
- जांजगीर-चांपा
- होटलों में यह पनीर टिक्का, सब्जी और रोल जैसे व्यंजनों में इस्तेमाल होता था
- ग्राहकों को इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती थी
सरकार ने लिया बड़ा फैसला
- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध का ऐलान किया
- खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी करेगा
- सरकार का कहना है कि लोगों को शुद्ध खाना देना उनकी पहली प्राथमिकता है
- जांच में पाया गया कि यह पनीर असली दूध से नहीं, बल्कि रसायनों से बना था
आगे क्या होगा?
- उपभोक्ता संगठनों ने बड़े स्तर पर सैंपलिंग जांच की मांग की है
- दोषी दुकानदारों और होटलों पर सख्त कार्रवाई की मांग हो रही है
- प्रतिबंध लागू होने के बाद उम्मीद है कि यह धोखाधड़ी रुकेगी
Read More:
WhatsApp Group Join Now
Facebook Page Follow Now
YouTube Channel Subscribe Now
Telegram Group Follow Now
Instagram Follow Now
Dailyhunt Join Now
Google News Follow Us!









