छत्तीसगढ़ में मानसून का कहर: 214 सड़कें क्षतिग्रस्त, 10 हजार किमी नेटवर्क प्रभावित

छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से 214 से ज्यादा सड़कें और कई पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त, करोड़ों की लागत वाली परियोजनाएं प्रभावित। पीडब्ल्यूडी ने मांगी रिपोर्ट, 30 नवंबर तक सुधार का लक्ष्य।
छत्तीसगढ़ में इस मानसून सीजन की बारिश ने सड़क और पुल निर्माण से जुड़े ढांचे की पोल खोल दी है। प्रदेशभर से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 214 से अधिक प्रमुख सड़कें बारिश की मार नहीं झेल पाईं, और इनसे जुड़ा करीब 10 हजार किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क क्षतिग्रस्त हो गया है।

कई इलाकों में हाल में बनी सड़कों पर पहली ही बारिश में दरारें दिखने लगीं, तो कुछ जगह पुल और पुलिया पूरी तरह बह गए। इससे लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को करोड़ों रुपये के नुकसान का अंदेशा है, और अब विभाग ने सभी क्षतिग्रस्त निर्माण कार्यों की समीक्षा शुरू कर दी है।
सबसे ज्यादा चर्चा बिलासपुर जिले की रतनपुर-पेंड्रा सड़क को लेकर है, जहां 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाली परियोजना में पहली बारिश में ही बड़ी दरारें आ गईं।

बिलासपुर: 510 करोड़ की सड़क पर सवाल
बिलासपुर जिले में रतनपुर से पेंड्रा तक बनी करीब 97 किलोमीटर लंबी सड़क, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-45 परियोजना का हिस्सा बताई जा रही है, पहली ही बरसात में सुर्खियों में आ गई।
- परियोजना की लागत करीब 510 करोड़ रुपये बताई जा रही है
- कई स्थानों पर सड़क पर लंबी दरारें और धंसाव देखा गया
- कुछ हिस्सों में डामर की परत उखड़ने की भी जानकारी सामने आई है
इतनी बड़ी लागत वाली सड़क का इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त होना निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है, हालांकि इस पर अभी विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

धमतरी में पुलिया और सड़क का बड़ा हिस्सा बहा
धमतरी जिले में भी बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया है।
- कोलियारी-खरेंगा मार्ग पर निर्माणाधीन पुलिया और सड़क का बड़ा हिस्सा तेज बहाव में बह गया, यह परियोजना करीब 84 करोड़ रुपये की बताई जा रही है
- फरसगांव क्षेत्र में दो दिन की लगातार बारिश से छिंदली-बड़ेडोंगर मार्ग का करीब पांच मीटर हिस्सा बह गया
- सदाड़ी गांव में पुलिया ढहने से आसपास के कई गांवों का संपर्क टूट गया है
इन इलाकों में ग्रामीणों को आवाजाही के लिए अभी वैकल्पिक और लंबे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सूरजपुर में 10 करोड़ का पुल बहा
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड में धोंधा नदी पर बना करीब 10 करोड़ रुपये का पुल तेज बारिश और नदी के उफान के आगे टिक नहीं पाया।
इस पुल के बहने से आसपास के दर्जनों गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क कट गया है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
राजनांदगांव ओवरब्रिज में 60-70 फीट लंबी दरार
राजनांदगांव के आलीवारा-मुसरा क्षेत्र में बना रेलवे ओवरब्रिज भी बारिश के बाद चर्चा में आ गया है।
- इस ओवरब्रिज की लागत करीब 22 से 50 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है
- आसपास की सड़क पर करीब 60 से 70 फीट तक लंबी दरारें देखी गई हैं
- दुर्ग जिले के सेमरिया गांव में भी करीब तीन किलोमीटर सड़क पर बड़ी संख्या में गड्ढों की शिकायत मिली है
बस्तर से सरगुजा तक असर, कई जिले प्रभावित
बारिश का असर सिर्फ बड़ी परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्टों के अनुसार रायपुर, धमतरी, दुर्ग, महासमुंद, बिलासपुर, रायगढ़, सूरजपुर, अंबिकापुर, कांकेर, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, कवर्धा और बेमेतरा समेत कई जिलों में सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
- बस्तर और सुकमा के अंदरूनी इलाकों में जलभराव और तेज बहाव से डामर उखड़ गया
- कांकेर में अंदरूनी सड़कों पर बड़े गड्ढों से आवागमन प्रभावित हुआ है
विभाग की कार्रवाई: 30 नवंबर तक सुधार का लक्ष्य
भारी नुकसान की खबरों के बाद लोक निर्माण विभाग हरकत में आया है। विभाग ने प्रदेशभर की क्षतिग्रस्त और निर्माणाधीन सड़कों, पुलों व पुलियाओं की स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है।
लोक निर्माण सचिव मुकेश बंसल ने विभाग को 30 नवंबर तक क्षतिग्रस्त और अधूरे निर्माण कार्यों में सुधार सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि:
- निर्माण गुणवत्ता में लापरवाही मिलने पर संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
- जरूरत पड़ने पर ठेकेदार के अपने खर्च पर ही दोबारा निर्माण या मरम्मत कराई जाएगी
आगे क्या होगा?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग की समीक्षा में किन परियोजनाओं और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय होती है, और तय समयसीमा में सड़कें व पुल कितनी दुरुस्त हो पाते हैं। इस मामले में आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।









