Chhattisgarh Employee Protest: DA, एरियर्स और पुरानी पेंशन को लेकर नया रायपुर में प्रदर्शन आज

छत्तीसगढ़ में DA, एरियर्स और नियमितीकरण समेत पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आज नया रायपुर के इंद्रावती भवन में कर्मचारी-पेंशनर सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे।
छत्तीसगढ़ में विभिन्न मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में नियमित, अनियमित कर्मचारी, अधिकारी और पेंशनर आज (11 सितंबर) नया रायपुर स्थित इंद्रावती भवन के सामने एक बड़ा सांकेतिक प्रदर्शन करने जा रहे हैं। ‘एक मांग, एक मंच’ अभियान के तहत आयोजित इस आंदोलन में राज्यभर के 55 से अधिक कर्मचारी संगठनों के वर्तमान और निवर्तमान प्रांताध्यक्ष शामिल होंगे।

यह प्रदर्शन दोपहर 1 बजे इंद्रावती भवन के गेट नंबर-3 के सामने किया जाएगा। कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि सरकार लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रही है, जिसके चलते उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस आंदोलन में महंगाई भत्ते (DA) से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक कई अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
55 से अधिक संगठनों की एकजुटता और ‘एक मांग, एक मंच’ अभियान
छत्तीसगढ़ के कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने इस बार अपनी ताकत दिखाने के लिए एक साझा मंच तैयार किया है। ‘एक मांग, एक मंच’ के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन में 55 से ज्यादा अलग-अलग संगठन हिस्सा ले रहे हैं। नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रदेशभर से कर्मचारियों के जुटने की संभावना है।

DA और एरियर्स भुगतान को लेकर कर्मचारियों में भारी नाराजगी
कर्मचारी संगठनों का मुख्य रोष महंगाई भत्ता (DA) और उसके एरियर्स को लेकर है। छत्तीसगढ़ प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष करन सिंह अटेरिया ने सरकार पर आर्थिक दमन का आरोप लगाया है।
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संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों को समय पर महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है।
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पूर्व में वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2026 से केंद्र के समान देय तिथि पर DA देने की बात कही गई थी, लेकिन इस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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कर्मचारी पिछले 86 महीनों के लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स के भुगतान की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण और ठेका पद्धति का विरोध
आंदोलन में अनियमित कर्मचारियों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया जाएगा। गोपाल प्रसाद साहू के अनुसार, साल 2023 के दौरान किए गए वादों के बावजूद आज तक अनियमित कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य क्षेत्रों में बढ़ रही ठेका पद्धति (Contract System) का भी विरोध किया जा रहा है। संगठनों का तर्क है कि ठेका प्रणाली से बेरोजगार युवाओं के हित और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित हो रही है।
नगरीय निकायों में पुरानी पेंशन और कैशलेस इलाज की मांग
कर्मचारी और पेंशनर वर्ग लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर भी मुखर रहा है।
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नगरीय निकायों में अब तक पुरानी पेंशन योजना लागू न किए जाने से कर्मचारियों में निराशा है।
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इसके साथ ही, संगठनों द्वारा कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 20 लाख रुपए तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से रखी जा रही है।
आगे क्या होगा? समाधान की उम्मीद या बढ़ेगा आंदोलन?
विद्याभूषण दुबे ने जानकारी दी है कि इससे पहले कर्मचारी संगठनों की ओर से वित्त मंत्री, मुख्य सचिव और वित्त विभाग के सचिव के साथ कई दौर की चर्चाएं हो चुकी हैं। हालांकि, बैठकों में कोई सकारात्मक समाधान न निकल पाने के कारण ही आज यह सांकेतिक प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। यदि सरकार अब भी इन पांच सूत्रीय मांगों पर कोई सुगबुगाहट नहीं दिखाती है, तो आने वाले दिनों में कर्मचारी आंदोलन को और तेज कर सकते हैं, जिससे प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।









