Chhattisgarh Forest Land Scam: रेंजर के साये में ‘भू-माफिया’ का खेल! जंगल काटकर बना डाले 30 घर, वन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

Chhattisgarh Forest Land Scam:Wadrafnagar Forest Encroachment News: छत्तीसगढ़ के वाड्रफनगर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां वन विभाग की नाक के नीचे ‘भू-माफिया’ (Land Mafia) फल-फूल रहे हैं। रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के तुगुवां गांव में सैकड़ों एकड़ शासकीय वन भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है, लेकिन विभाग इस पूरे मामले पर मौन (Silent) साधे बैठा है।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह सब स्थानीय रेंजर और वन विभाग के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों के संरक्षण (Protection) में हो रहा है।
जंगल काटकर खड़े कर दिए 30 ‘अवैध’ मकान
Chhattisgarh Forest Land Scam:ग्रामीणों के अनुसार, भू-माफियाओं ने न केवल जंगल की जमीन पर कब्जा किया है, बल्कि वहां से कीमती पेड़ों की अवैध कटाई (Illegal Logging) भी की जा रही है।
Modus Operandi: जंगल की लकड़ी का इस्तेमाल करके ही वहां खुलेआम 30 से अधिक मिट्टी के घर बनाए जा चुके हैं।
Inter-State Mafia: आरोप है कि इस खेल में दूसरे राज्यों से आए भू-माफिया भी शामिल हैं, जो स्थानीय लोगों को डरा-धमकाकर जंगल की जमीन हड़प रहे हैं।
बार-बार शिकायत, फिर भी कार्रवाई ‘जीरो’
Chhattisgarh Forest Land Scam:हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों ने इस अवैध कब्जे की शिकायत लिखित और मौखिक रूप से कई बार वन विभाग के आला अधिकारियों से की है। लेकिन अब तक:
न तो कोई अवैध निर्माण ढहाया गया।
न ही पेड़ों की कटाई पर रोक लगी।
न ही किसी भू-माफिया के खिलाफ FIR दर्ज हुई।
Chhattisgarh Forest Land Scam:ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों की यह Inactivity (निष्क्रियता) संदेह पैदा करती है। क्या बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत (Collusion) के इतने बड़े पैमाने पर जंगल पर कब्जा संभव है?
पर्यावरण पर गहराता खतरा (Ecological Impact)
Chhattisgarh Forest Land Scam:अगर जंगलों की इसी तरह कटाई होती रही, तो आने वाले समय में वाड्रफनगर क्षेत्र को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है:
Water Crisis: पेड़ों की कमी से जल संकट गहराएगा।
Wildlife Displacement: जंगली जानवर बस्तियों की ओर रुख करेंगे।
Climate Change: स्थानीय स्तर पर पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होगा।
ग्रामीणों की मांग: हो उच्चस्तरीय जांच
Chhattisgarh Forest Land Scam:गुस्साए ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन और राज्य सरकार से High-level Inquiry की मांग की है। उनकी मांग है कि:
दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए।
अवैध कब्जों को तत्काल हटाकर वन भूमि को मुक्त कराया जाए।
वन क्षेत्र में नियमित गश्त (Patrolling) बढ़ाई जाए।
Chhattisgarh Forest Land Scam:जंगल की कीमती जमीन को बचाना न केवल प्रशासन की जिम्मेदारी है, बल्कि यह हमारे भविष्य के लिए भी जरूरी है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस ‘भू-माफिया राज’ पर नकेल कस पाता है या वन विभाग इसी तरह आंखें मूंदे रहेगा।









![शिक्षा सत्र का डेढ़ माह बीता, अब तक स्कूलों में नहीं पहुंचीं किताबें, पुरानी पुस्तकों के सहारे भविष्य की पढ़ाई गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र 2025-26 शुरू हुए डेढ़ महीने से अधिक का समय हो गया है, लेकिन गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के सरकारी स्कूलों में छात्रों के बस्ते अब भी खाली हैं।[1] पाठ्य पुस्तक निगम की लापरवाही के चलते अधिकांश कक्षाओं की किताबें अब तक स्कूलों तक नहीं पहुंच पाई हैं।[1][2] इस स्थिति के कारण छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और वे पुरानी किताबों से काम चलाने को मजबूर हैं।[1] त्रैमासिक परीक्षा सिर पर, कैसे पूरा होगा कोर्स? स्कूलों में किताबों की यह कमी शिक्षकों और अभिभावकों दोनों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है। लगभग डेढ़ महीने बाद त्रैमासिक परीक्षाएं होनी हैं, ऐसे में बिना नई किताबों के पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती है।[1] जिले के प्राइमरी से लेकर मिडिल स्कूलों तक में यही स्थिति है। उदाहरण के लिए, कक्षा 6वीं के छात्रों को सिर्फ गणित की किताब मिली है, जबकि 8वीं के छात्रों को भी कुछ ही विषयों की पुस्तकें प्राप्त हुई हैं।[1] नए पाठ्यक्रम के कारण पुरानी किताबों से पढ़ाई करना भी पूरी तरह संभव नहीं हो पा रहा है।[1] क्यों हुई किताबों के वितरण में देरी? इस साल किताबों के वितरण में देरी के कई कारण सामने आ रहे हैं: तकनीकी खामियां: इस वर्ष भ्रष्टाचार रोकने के लिए किताबों पर बारकोड लगाए गए हैं।[3][4] लेकिन पाठ्य पुस्तक निगम के पोर्टल का सर्वर बार-बार डाउन होने से स्कूलों में किताबों की स्कैनिंग और डेटा अपलोडिंग का काम अटक गया है, जिससे वितरण रुका हुआ है।[5][6] पुराने डेटा पर छपाई: किताबों की छपाई पुराने यू-डायस (UDISE) डेटा और पिछले साल के स्टॉक के आधार पर की गई। इसमें नए दाखिलों और छात्रों की बढ़ी हुई संख्या का अनुमान नहीं लगाया गया, जिससे कई स्कूलों में मांग के अनुरूप किताबें नहीं पहुंचीं।[1][2] वितरण में अव्यवस्था: पाठ्य पुस्तक निगम से स्कूलों तक किताबें पहुंचाने की प्रक्रिया में भी अव्यवस्था देखने को मिली है।[2][5] प्रशासन के दावों के बावजूद स्थिति जस की तस हालांकि, पाठ्य पुस्तक निगम और शिक्षा विभाग के अधिकारी जल्द ही किताबें पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।[2][5] स्कूल प्रबंधन द्वारा जिला कार्यालय को किताबों की मांग के लिए पत्र लिखे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।[1] इस लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर प्राइमरी और मिडिल स्कूल के मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। अभिभावकों और शिक्षकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द किताबों की व्यवस्था की जाए ताकि छात्रों की पढ़ाई और भविष्य अधर में न लटके।[1]](https://nidarchhattisgarh.com/wp-content/uploads/2025/08/16a.jpg)









