नवयुवक की मौत: एसआर अस्पताल की ठेका पद्धति पर सवाल

चिकित्सा क्षेत्र, जिसे कभी सेवा का प्रतीक माना जाता था, अब व्यापार का केंद्र बनता जा रहा है। मरीजों की जान से अधिक पैसे की लालसा ने चिकित्सा को मानवता से दूर कर दिया है। दुर्ग में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने चिकित्सा जगत के मानवीय पक्ष पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवयुवक की मौत: एसआर अस्पताल की ठेका पद्धति पर सवाल
मामला: 19 वर्षीय रोहित कवर की दर्दनाक मौत
10 दिसंबर को ग्राम खुतेरी निवासी रोहित कवर (19) का क्रेशर मशीन में हाथ कट गया। उसे तत्काल गुंडरदेही के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे जिला चिकित्सालय, दुर्ग रेफर किया गया। लेकिन इलाज की प्रक्रिया के दौरान एसआर अस्पताल में ले जाकर ठेका पद्धति के इलाज का खेल शुरू हुआ। नवयुवक की मौत: एसआर अस्पताल की ठेका पद्धति पर सवाल
कैसे शुरू हुआ यह खेल?
- शासकीय एम्बुलेंस के चालक और सहायक ने मरीज के परिजनों पर निजी अस्पताल (एसआर अस्पताल) में इलाज कराने का दबाव बनाया।
- जिला चिकित्सालय पहुंचते ही एसआर अस्पताल की एम्बुलेंस तैयार खड़ी मिली।
- मरीज को एसआर अस्पताल ले जाकर इलाज के लिए ₹2 लाख का ठेका तय हुआ। नवयुवक की मौत: एसआर अस्पताल की ठेका पद्धति पर सवाल
इलाज के नाम पर ठगी और लापरवाही
- ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत बिगड़ती गई।
- परिजन दूसरे अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने ₹1.5 लाख बकाया भुगतान के बिना मरीज को जाने नहीं दिया।
- इलाज के अभाव में युवक ने सुबह 4 बजे दम तोड़ दिया। नवयुवक की मौत: एसआर अस्पताल की ठेका पद्धति पर सवाल
मौत के बाद भी जारी रहा उत्पीड़न
एसआर अस्पताल प्रबंधन ने बकाया राशि जमा होने तक मृतक का शव देने से इनकार कर दिया। परिजनों और मीडिया के दबाव के बाद दोपहर 2-3 बजे शव सौंपा गया। नवयुवक की मौत: एसआर अस्पताल की ठेका पद्धति पर सवाल
बड़े सवाल उठते हैं:
- क्या ठेका पद्धति से इलाज करना वैध है?
- सरकारी कर्मचारी निजी अस्पताल के लिए दबाव क्यों बना रहे हैं?
- शासकीय अस्पताल परिसर में निजी अस्पताल की एम्बुलेंस कैसे पहुंची?
- जिला चिकित्सालय से अधिकांश मरीज एसआर अस्पताल ही क्यों भेजे जाते हैं?
- एसआर अस्पताल के एजेंट अस्पताल परिसर में कैसे घूमते रहते हैं? नवयुवक की मौत: एसआर अस्पताल की ठेका पद्धति पर सवाल



















