GPM Administration Controversy: कहीं सख्ती तो कहीं चुप्पी! क्या नियमों को ताक पर रख रहा प्रशासन? चक्का जाम की चेतावनी

GPM Administration Controversy:GPM जिले में प्रशासन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल। कहीं FIR तो कहीं चुप्पी! सरपंच और सचिव संघ ने दी चक्का जाम की चेतावनी। क्या है मटियाडांड और सेखवा पंचायत का मामला? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
GPM Administration Controversy:छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में इन दिनों प्रशासनिक कार्यप्रणाली (Administrative Working Style) को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। प्रशासन के “दोहरे मापदंड” (Double Standards) और कार्रवाई में भेदभाव के आरोपों ने जिले के माहौल को गरमा दिया है। स्थिति अब आंदोलन, चक्का जाम और हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है।
Administrative Chaos: एक जिला, अलग-अलग कानून?
GPM Administration Controversy:GPM जिले में पिछले कुछ दिनों में लिए गए प्रशासनिक फैसलों ने जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि प्रशासन कहीं तो बहुत ज्यादा सख्त है, तो कहीं गंभीर शिकायतों के बावजूद पूरी तरह खामोश बैठा है।
इन 4 मामलों ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किलें (Key Controversies):
1. मटियाडांड vs सेखवा पंचायत (Small vs Big Amount):
Matiadand Case: मात्र ₹38 हजार के मामले में वेंडर के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में FIR दर्ज कर दी गई।
Sekhwa Case: इसके ठीक उलट, सेखवा पंचायत में स्ट्रीट लाइट से जुड़े लाखों रुपये के गबन के आरोप हैं, लेकिन यहां प्रशासन ने अब तक कोई ठोस एक्शन नहीं लिया है।
सवाल: क्या छोटी रकम के लिए कानून अलग है और बड़ी हेराफेरी के लिए अलग?
2. 8 सचिवों का निलंबन और ₹1.20 करोड़ का मामला:
GPM Administration Controversy:गौरेला क्षेत्र में 15वें वित्त आयोग की राशि में गड़बड़ी के आरोप में 8 पंचायत सचिवों को सस्पेंड कर दिया गया है। सरपंच और सचिव संघ का आरोप है कि बिना निष्पक्ष जांच (Impartial Inquiry) के यह कार्रवाई की गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहां ₹1.20 करोड़ वेंडर के खाते में चले गए, वहां अभी तक FIR दर्ज क्यों नहीं हुई?
3. इंजीनियर पर गंभीर आरोप, फिर भी मौन:
GPM Administration Controversy:मरवाही में पदस्थ एक इंजीनियर पर महिलाओं से अभद्र व्यवहार और अवैध वसूली (Illegal Recovery) जैसे सीरियस एलिगेशन लगे हैं। सरपंच संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी टूट नहीं रही है।
4. CEO का हाईकोर्ट का रुख:
GPM Administration Controversy:कलेक्टर स्तर पर दो जनपद CEOs को हटाने की कार्रवाई को भी ‘पक्षपातपूर्ण’ बताया जा रहा है। मामला अब High Court की दहलीज पर है, जिससे प्रशासनिक साख पर सवाल उठ रहे हैं।
चक्का जाम और आंदोलन की तैयारी (Protest Alert)
GPM Administration Controversy:प्रशासन की इस कार्यशैली से नाराज सरपंच और सचिव संघ अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। गौरेला में चक्का जाम और मरवाही में बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। उनकी मांग है कि:
सभी मामलों की निष्पक्ष और एक समान जांच हो।
सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर गाज न गिरे, असली जिम्मेदारों पर FIR हो।
प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता (Transparency) लाई जाए।
GPM Administration Controversy: जब किसी जिले में प्रशासनिक फैसले Selective Action की तरह दिखने लगें, तो वह लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंता का विषय बन जाता है। GPM प्रशासन पर उठ रहे ये सवाल न केवल उनकी विश्वसनीयता कम कर रहे हैं, बल्कि सरकारी कामकाज को भी प्रभावित कर रहे हैं।



















