दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल: न खाना, न किताबें… बारिश में भीगते हुए कलेक्टर बंगले पर सैकड़ों छात्राओं का हल्लाबोल

दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल: न खाना, न किताबें… बारिश में भीगते हुए कलेक्टर बंगले पर सैकड़ों छात्राओं का हल्लाबोल
दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की 100 से अधिक छात्राएं मूसलाधार बारिश में भीगते हुए अपनी शिकायतों को लेकर सीधे कलेक्टर बंगले पहुंच गईं। रोती-बिलखती इन बच्चियों ने स्कूल में सुविधाओं के घोर अभाव और आश्रम अधीक्षक द्वारा किए जाने वाले दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अधीक्षक पर दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप, सुविधाओं का भारी टोटा
कलेक्टर बंगले के बाहर प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उन्हें कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
अव्यवस्था का आलम: उन्हें समय पर और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं दिया जाता। पीने के साफ पानी तक की व्यवस्था नहीं है।
अध्ययन सामग्री का अभाव: शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बावजूद, उन्हें अब तक स्कूल ड्रेस, किताबें और कॉपियां जैसी जरूरी चीजें भी नहीं दी गई हैं।
अधीक्षक पर गंभीर आरोप: छात्राओं ने सबसे गंभीर आरोप आश्रम अधीक्षक पर लगाते हुए कहा कि वह उनके साथ दुर्व्यवहार करती हैं, जिससे वे मानसिक रूप से बेहद प्रताड़ित और भयभीत महसूस करती हैं।
जिम्मेदार अधिकारी नदारद, तूलिका कर्मा ने सुनीं समस्याएं
यह बेहद चिंताजनक है कि जब ये बेटियां अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर हुईं, तो शिक्षा विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। हालांकि, सूचना मिलते ही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तूलिका कर्मा तुरंत वहां पहुंचीं। उन्होंने छात्राओं से बात कर उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल
‘बेटी बचाओ’ के नारे के बीच आवासीय स्कूलों का बुरा हाल
यह घटना जिले में पहली बार नहीं हुई है। कुछ ही दिन पहले ‘छू लो आसमान’ आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने भी इसी तरह सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था। एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों पर जोर दे रही है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन आवासीय विद्यालयों की बदतर होती हालत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। 200 से अधिक छात्राओं वाले इस विद्यालय में जब शिक्षा और सुरक्षा की बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हैं, तो इन बच्चियों का भविष्य कैसे संवरेगा? छात्राओं और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी अधीक्षक को तत्काल हटाया जाए और विद्यालय की व्यवस्थाओं को तुरंत सुधारा जाए।दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल



















