कनेक्टिंग ट्रेन छूटने पर अब नहीं मिलेगी राहत, रेलवे ने बदला पुराना नियम

ट्रेन लेट होने पर कनेक्टिंग ट्रेन पकड़ने की पुरानी छूट अब खत्म। रिपोर्टों के अनुसार टीटीई-स्टेशन मास्टर की स्लिप सुविधा बंद, यात्रियों को टिकट कैंसिलेशन का सामना करना पड़ सकता है।
लंबी दूरी की यात्रा करने वाले रेल यात्रियों के लिए एक जरूरी खबर सामने आई है। अब तक अगर कोई ट्रेन देरी से चलती थी और यात्री की अगली कनेक्टिंग ट्रेन छूटने की नौबत आ जाती थी, तो टीटीई या स्टेशन मास्टर की अनुमति से यात्री बिना अतिरिक्त शुल्क दिए दूसरी ट्रेन में सफर पूरा कर सकते थे।

रिपोर्टों के अनुसार, यह पुरानी व्यवस्था अब लागू नहीं रही। ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह के टिकटों पर यह छूट हटाई जा चुकी है। इसका सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ेगा जो एक ट्रेन से उतरकर दूसरी ट्रेन पकड़ने की योजना बनाते हैं, खासकर तब जब पहली ट्रेन के लेट होने की आशंका बनी रहती है।
इस बदलाव के बाद देरी की स्थिति में यात्रियों के पास मुख्य रूप से टिकट कैंसिल कराने का ही विकल्प बचता है, जिससे उन्हें समय के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

पहले क्या सुविधा मिलती थी?
पुरानी व्यवस्था में कंफर्म ई-टिकट रखने वाले यात्रियों को खास राहत दी जाती थी।
- अगर पहली ट्रेन देरी से चलने के कारण कनेक्टिंग ट्रेन छूट रही होती थी, तो टीटीई या स्टेशन मास्टर लिखित स्लिप जारी करते थे।
- इस स्लिप के आधार पर यात्री बिना कोई अतिरिक्त भुगतान किए दूसरी ट्रेन में यात्रा जारी रख सकता था।
- यह सुविधा खासतौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत का जरिया थी।
क्या बदला है?
रिपोर्टों के मुताबिक, रेलवे ने इस पूरी व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। अब देरी की स्थिति में यात्री के पास टिकट कैंसिल कराने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता।

इसका असर यह होगा:
- यात्री को कैंसिलेशन नियमों के अनुसार ही रिफंड मिलेगा, पूरा पैसा वापस नहीं मिलेगा।
- बिना कनेक्टिंग ट्रेन के यात्रा की योजना बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
- यात्री का समय भी बर्बाद होगा, क्योंकि नई टिकट अलग से बुक करनी होगी।
टिकट कैंसिलेशन पर रिफंड के नियम
अगर ट्रेन छूटने की स्थिति में टिकट कैंसिल करानी पड़े, तो रिफंड राशि इस बात पर निर्भर करती है कि कैंसिलेशन ट्रेन के तय समय से कितनी देर पहले किया गया है।
- ट्रेन छूटने के बाद कैंसिलेशन पर कोई रिफंड नहीं मिलता।
- ट्रेन के तय समय से 8 घंटे पहले तक कैंसिलेशन पर भी रिफंड नहीं मिलता।
- 24 से 8 घंटे पहले कैंसिल करने पर 50 प्रतिशत रिफंड मिलता है।
- 72 से 24 घंटे पहले कैंसिल करने पर 75 प्रतिशत रिफंड मिलता है।
- 72 घंटे से पहले कैंसिल करने पर सिर्फ फ्लैट कैंसिलेशन चार्ज कटता है, बाकी राशि वापस मिल जाती है।
कैंसिलेशन चार्ज किस क्लास में कितना?
72 घंटे पहले टिकट कैंसिल कराने पर हर क्लास के हिसाब से तय चार्ज काटा जाता है:
- स्लीपर क्लास – 120 रुपए
- सेकंड सिटिंग – 60 रुपए
- फर्स्ट एसी/एग्जीक्यूटिव क्लास – 240 रुपए
- एसी सेकंड टियर – 200 रुपए
- एसी थर्ड टियर/एसी चेयर कार/एसी 3 इकॉनमी – 180 रुपए (इस पर जीएसटी भी अलग से लगेगा)
किन यात्रियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
यह बदलाव खासतौर पर उन यात्रियों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है जो एक ट्रेन से उतरकर दूसरी ट्रेन पकड़कर आगे की यात्रा पूरी करते हैं। ट्रेन में देरी होना भारतीय रेलवे में असामान्य नहीं है, ऐसे में कनेक्टिंग यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों को अब अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
आगे क्या करें यात्री?
- यात्रा से पहले ट्रेन की संभावित देरी की जानकारी जरूर चेक करें।
- कनेक्टिंग ट्रेन बुक करते समय दोनों ट्रेनों के बीच पर्याप्त समय का अंतर रखें।
- अगर देरी की आशंका दिखे तो समय रहते विकल्प तलाशना बेहतर रहेगा, ताकि अंतिम समय में टिकट कैंसिलेशन जैसी स्थिति से बचा जा सके।
- इस बदलाव को लेकर आधिकारिक पुष्टि और अपडेट के लिए रेलवे की वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।
Read More:









