मुंबई BEST बसों में मछली बेचने वाली कोली महिलाओं को रोके जाने के आरोप, प्रशासन ने दी सफाई

मुंबई की कोली मछली विक्रेता महिलाओं ने BEST बसों में गंध के नाम पर प्रवेश रोकने का आरोप लगाया है। BEST का कहना है कि उचित कंटेनर में मछली ले जाने की अनुमति है।
मुंबई की कोली समुदाय की मछली विक्रेता महिलाओं ने आरोप लगाया है कि मछली की गंध का हवाला देकर BEST बसों के कंडक्टर उन्हें बस में चढ़ने से रोक देते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ महिलाओं का कहना है कि उन्हें तब भी बस से उतारा गया, जब उनके पास मछली थी ही नहीं।

BEST प्रशासन ने इन आरोपों पर कहा है कि नियमों के तहत मछली कारोबार से जुड़े लोग बस में यात्रा कर सकते हैं, बशर्ते मछली उचित कंटेनर में रखी हो। बड़ी टोकरियों से पानी टपकने या दूसरे यात्रियों को असुविधा होने पर पाबंदी लगाई जा सकती है।
मामला इसलिए अहम है क्योंकि यह रोजी-रोटी, सार्वजनिक परिवहन तक समान पहुंच और यात्री सुविधा के बीच संतुलन का सवाल उठाता है।

क्या हैं कोली महिलाओं के आरोप?
महिलाओं के मुताबिक, कुछ कंडक्टर दरवाजे पर ही उन्हें रोक देते हैं। कथित वजह यह बताई जाती है कि मछली की गंध से दूसरे यात्रियों को परेशानी होती है।
उनका कहना है कि बस से सफर उनके लिए सुविधा के साथ-साथ कारोबार की लागत कम रखने का जरिया भी है। कई बार मछली के अलावा दूसरा सामान ले जाने पर भी उन्हें दिक्कत झेलनी पड़ती है।

BEST प्रशासन का पक्ष
BEST के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार:
- मछली कारोबार से जुड़े लोगों को बस में यात्रा की अनुमति है
- मछली उचित कंटेनर में रखना जरूरी है
- पानी टपकने या अन्य यात्रियों को असुविधा होने पर रोक लग सकती है
- कार्रवाई पेशे के आधार पर नहीं, यात्रा के दौरान होने वाली परेशानी के आधार पर होने की बात कही गई है
हालांकि महिलाओं का दावा है कि बिना मछली के होने पर भी उन्हें उतार दिया गया।
लता कुंडे का मामला
60 वर्षीय लता कुंडे का आरोप है कि करीब दो महीने पहले घर लौटते समय उन्हें ए-200 बस से उतरने को मजबूर किया गया। उनके अनुसार, कर्मचारियों ने टोकरी की जांच किए बिना सामान बाहर फेंक दिया। टोकरी में मछली नहीं, बल्कि कांच की चूड़ियां, बटुआ और निजी सामान था।
यह आरोप अभी महिला का दावा है। इस पर BEST की ओर से अलग से कोई टिप्पणी रिपोर्ट में दर्ज नहीं है।
मुंबई के मछली कारोबार में कोली महिलाओं की भूमिका
कोली समुदाय को मुंबई के शुरुआती निवासियों में गिना जाता है। पारंपरिक रूप से पुरुष समुद्र में मछली पकड़ते थे और महिलाएं बाजारों में बिक्री संभालती थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, तटीय इलाकों में भराव, निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास से खाड़ियों में मछली पकड़ना प्रभावित हुआ है। इसलिए कई महिलाएं अब ससून डॉक जैसे बाजारों से मछली खरीदकर अलग-अलग इलाकों में बेचती हैं।
- ससून डॉक में रोजाना करीब 150 टन मछली और समुद्री खाद्य का कारोबार बताया गया है
- इसका लगभग 80 फीसदी हिस्सा मुंबई महानगर क्षेत्र के बाजारों में पहुंचता है
बढ़ता किराया, बढ़ती अनिश्चितता
70 वर्षीय सीता कमलचा ने बताया कि दशकों पहले वह मां के साथ परेल के भोईवाड़ा मछली बाजार से खार डांडा तक बस से जाती थीं। तब करीब एक घंटे के सफर का किराया चार आने (25 पैसे) था। आज वैसे ही सफर के लिए लगभग 30 रुपये लगते हैं।
महिलाओं की चिंता सिर्फ किराये की नहीं है। उनके लिए बड़ा सवाल यह है कि हर बार बस में प्रवेश मिलेगा या नहीं।
शिकायत कैसे करें और क्या कार्रवाई हो सकती है?
BEST के अनुसार यात्रियों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन उपलब्ध है और बस टर्मिनलों पर शिकायत पेटियां भी रखी गई हैं।
- पहली शिकायत पर संबंधित कर्मचारी को चेतावनी दी जा सकती है
- दोबारा गलती पाए जाने पर गंभीरता के हिसाब से एक से दो दिन का निलंबन संभव है
आगे क्या?
BEST समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव ने कहा कि हर व्यक्ति को पेशे या आय की परवाह किए बिना सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो मामले को देखा जाएगा।
फिलहाल किसी औपचारिक जांच, नई गाइडलाइन या कंडक्टरों के लिए अलग निर्देश की पुष्टि नहीं हुई है। आधिकारिक अपडेट का इंतजार है









