“एक बिल, दो भुगतान” — SDO मोहले ने CEO के आदेश को दरकिनार कर पास किया फर्जी बिल

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की जनपद पंचायत मरवाही में 15वें वित्त की राशि में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। आरोप है कि CEO और इंजीनियर के काम रोकने के लिखित आदेश के बावजूद SDO मोहले ने एक ही बिल से दो बार भुगतान करवा दिया।
क्या है पूरा मामला
- घटना ग्राम पंचायत नरौर के आश्रित गांव झिरना पोड़ी की है
- यहां भारी बरसात में अवैध पुल निर्माण कराया जा रहा था
- CEO मरवाही और इंजीनियर मौके पर पहुंचकर “तत्काल काम रोकें” का लिखित आदेश दे चुके थे
- शिकायत यह भी थी कि पुल का हिस्सा भूमि स्वामी के खेत में 4 फिट अंदर तक बनाया गया था
- नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि आदेश के बावजूद SDO मोहले ने बिल पास कर दिया
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
- बिल क्रमांक 713, दिनांक 28 जून 2026, फर्म का नाम संकल्प मेटल एण्ड स्टील, निमधा
- इसी एक बिल को दो अलग-अलग वाउचर नंबर पर इस्तेमाल किया गया:
- RCC पुलिया निर्माण (झिरना पोड़ी से पिपरिया मार्ग)
- नाली निर्माण (ओमप्रकाश मरावी के खेत के पास)
- PFMS रिकॉर्ड के अनुसार दोनों कामों के लिए एक ही तारीख 7 जुलाई 2026 को 2-2 लाख रुपये का भुगतान हुआ
- यानी एक बिल से कुल 4 लाख रुपये निकाल लिए गए
किन नियमों का हुआ उल्लंघन
- छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993, धारा 40 — CEO के लिखित आदेश की अवहेलना दंडनीय अपराध है
- छत्तीसगढ़ वित्तीय नियम 2017 — एक ही बिल से दो बार भुगतान और फर्जी वाउचर बनाना गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जाता है
- छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम — पद का दुरुपयोग कर सरकारी राशि के गबन से जुड़ा प्रावधान
- PWD मैनुअल — बिना तकनीकी स्वीकृति और बिना वर्क ऑर्डर के निर्माण व भुगतान प्रतिबंधित है
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
कलेक्टर GPM से ग्रामीणों ने ये मांगें रखी हैं:

- SDO मोहले और सरपंच पर तुरंत FIR दर्ज कर निलंबन की कार्रवाई हो
- फर्जी बिल देने वाली फर्म संकल्प मेटल एण्ड स्टील का लाइसेंस रद्द हो
- अवैध रूप से निकाली गई राशि की तत्काल रिकवरी हो
- पूरे मामले की EOW (आर्थिक अपराध शाखा) से जांच कराई जाए
ग्रामीणों का कहना है कि 15वें वित्त की राशि से गांव का विकास होना था, लेकिन आरोप है कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह राशि गलत तरीके से निकाल ली गई। यह खबर प्राप्त बिल, PFMS रिकॉर्ड और ग्रामीणों के आरोपों पर आधारित है।










