खण्ड विकास अधिकारी ऐलनाबाद को राज्य सूचना आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए व्यक्तिगत रूप से चंडीगढ़ किया तलब
12 दिसम्बर को होना होगा राज्य सूचना आयुक्त माननीय जय सिंह के समक्ष पेश ।
NCG News desk Haryana :-
ऐलनाबाद l सूचना का अधिकार दिन प्रतिदिन दंतहीन हथियार बनता जा रहा है और अधिकांश जनसूचना अधिकारी इसे कमजोर करने में लगे हुए है । इसका सबसे कारण यह माना जाता है कि इस एक्ट में राज्य सूचना आयोग के पास, सूचना ने देने वाले को जेल की सजा न देने की शक्तियां है । राज्य सूचना आयोग केवल मात्र आर्थिक दंड लगा सकता है और सूचना न देने वाला जन सूचना अधिकारी ऐसे आर्थिक दण्ड से बेपरवाह हो सरकार के किसी मद से दंड भर देता है l जबकि यह दंड जनसूचना अधिकारी की सैलरी से भरा जाना होता है और एसीआर में भी चढ़ाना होता है । लेकिन जागरूकता के अभाव में सूचना मांगने वाला भी ऐसे दंड को भरवा बिना सूचना लिए ही चुप हो जाता है । खैर कुछ भी हो यह अधिकार हर दिन कमजोर होता नजर आता है । खण्ड विकास अधिकारी ऐलनाबाद
ऐसा ही एक उदाहरण ऐलनाबाद के खंड विकास अधिकारी ऐलनाबाद द्वारा राज्य सूचना आयोग के आदेश के बाद भी किसी भी प्रकार की सूचना न देने और आयोग द्वारा कारण बताओ नोटिस के आदेश के बावजूद भी अनुपालना न करने का मामला देखने को मिला है । काबिलेगौर है कि सूचना का अधिकार जाग्रति मंच के अध्यक्ष एडवोकेट सुरेन्द्र सरदाना ने ऐलनाबाद के खंड विकास अधिकारी से कुछ बिंदुओं पर सूचनाए मांगी और पूछा गया कि जब वर्ष 2019 में हरियाणा के सरपंचो का कार्यकाल खत्म हो गया था और तकरीबन 18 वर्ष तक पंचायत के चुनाव नही हुए थे तो उस समय के दौरान ऐलनाबाद खण्ड के प्रत्येक गांव में कुल कितने विकास कार्य हुए थे और यह विकास कार्य कौन से अधिकारी की देखरेख में हुए थे, आदि की सम्पूर्ण जानकारी मांगी थी । इसके इलावा एडवोकेट सरदाना ने यह भी पूछा था कि खण्ड विकास कार्यालय में बनाए गए एक मीटिंग हाल पर कितनी सरकारी धन राशि खर्च हुई थी ओर ऐसे अलग से मीटिंग हाल का भवन निर्माण की कौन से अधिकारी ने प्रशासनिक स्वीकृति दी थी । खण्ड विकास अधिकारी ऐलनाबाद

इस प्रकार सरदाना द्वारा मांगी जानकारी खण्ड विकास अधिकरी कार्यालय द्वारा प्रदत्त न करने पर सरदाना ने इसकी एक्ट के अनुसार प्रथम अपीलीय अधिकारी को की । लेकिन परिणाम फिर वही ढाक के तीन पात रहा । उसके बाद सरदाना ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया और आरटीआई एक्ट 2005 के सेक्शन 19 (3) के तहत द्वितीय अपील की । जिस पर संज्ञान लेते हुए राज्य सूचना आयोग ने आवेदक द्वारा सूचनाएं देने के लिए आदेश पारित किया और अपना पक्ष रखने के लिए चंडीगढ़ अपने कार्यालय में तलब किया लेकिन खण्ड विकास अधिकारी ने राज्य सूचना आयोग के आदेश की भी कोई परवाह नही की जिसके चलते न ही तो आवेदक को किसी प्रकार की पूर्ण सूचनाए प्रदत की गई और न ही आयोग के समक्ष पेश हुए । राज्य सूचना आयोग ने अब सख्ती दिखाते हुए खण्ड विकास अधिकारी को आरटीआई एक्ट 2005 की धारा 20 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उन्हें 12 दिसम्बर को व्यक्तिगत रूप से चंडीगढ़ आयोग कार्यालय में पेश होने के आदेश पारित किए है । खण्ड विकास अधिकारी ऐलनाबाद
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