उदयपुर-साल्हे कला सड़क पर गड्ढों से हाल बेहाल, स्कूली बच्चों को रोज परेशानी

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी उदयपुर-साल्हे कला सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त। जनपद सदस्य की मांग के बावजूद अब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं, ग्रामीणों में नाराजगी।
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई उदयपुर-साल्हे कला सड़क अब खुद ही मरम्मत की मोहताज हो गई है। बोरई रोड, कुटेली कला और साल्हे कला के आसपास के हिस्सों में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले ग्रामीणों, वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढों के कारण न सिर्फ वाहन चलाना मुश्किल हो गया है, बल्कि कई बार वाहन गड्ढों में फंसने से हादसे जैसी स्थिति भी बन चुकी है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन बच्चों को हो रही है, जो रोज इसी सड़क से स्कूल आते-जाते हैं।
समस्या को लेकर जनपद सदस्य कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक बात पहुंचा चुके हैं, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

कहां-कहां है सड़क की सबसे बुरी हालत?
ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या पूरे मार्ग पर एक जैसी नहीं है, बल्कि कुछ खास हिस्सों में स्थिति ज्यादा गंभीर है:
- बोरई रोड – यहां सड़क पर गहरे गड्ढे बन चुके हैं
- कुटेली कला – सड़क की सतह जगह-जगह उखड़ चुकी है
- साल्हे कला क्षेत्र – वाहन चलाना यहां सबसे ज्यादा मुश्किल बताया जा रहा है
इन इलाकों से रोजाना गुजरने वाले लोगों को सतर्कता के साथ धीमी गति में वाहन चलाना पड़ता है, फिर भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

किस पर पड़ रहा है सबसे ज्यादा असर?
सड़क की खराब हालत का सीधा असर अलग-अलग वर्गों पर पड़ रहा है:
- स्कूली बच्चे: रोज स्कूल आने-जाने में परेशानी और सुरक्षा को लेकर खतरा
- किसान: खेतों और बाजार तक उपज पहुंचाने में दिक्कत
- वाहन चालक: गड्ढों में वाहन फंसने से नुकसान और हादसे की आशंका
- आम राहगीर: पैदल आवागमन में भी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से समस्या और भी विकराल रूप ले लेती है, जिससे गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है।
जनपद सभा से लेकर मंत्री तक पहुंचा मामला, फिर भी नतीजा नहीं
सड़क की बदहाली का मुद्दा स्थानीय स्तर पर लंबे समय से उठाया जा रहा है। जनपद सदस्य दुष्यंत जंघेल ने बताया कि उन्होंने जनपद सभा में इस विषय को कई बार उठाया है और संबंधित अधिकारियों को भी स्थिति से अवगत कराया है।
इतना ही नहीं, विधायक और मंत्री को पत्र लिखकर भी सड़क की खराब हालत की जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक मरम्मत को लेकर कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
क्या बदलना चाहिए? ग्रामीणों की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अब सिर्फ खानापूर्ति वाली मरम्मत से काम नहीं चलेगा। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर सड़क का वास्तविक निरीक्षण करे
- खराब हिस्सों की सही पहचान कर जल्द मरम्मत कार्य शुरू हो
- अगर सड़क सामान्य मरम्मत से ठीक नहीं हो सकती, तो नए सिरे से निर्माण किया जाए
- मरम्मत कार्य में गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए, ताकि समस्या दोबारा न लौटे
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस मामले में विभाग की ओर से मरम्मत या निर्माण को लेकर कोई आधिकारिक समयसीमा सामने नहीं आई है। जनपद सदस्य ने एक बार फिर संबंधित विभाग से मामले को गंभीरता से लेने और जल्द कार्रवाई करने की मांग दोहराई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क दुरुस्त होने से न सिर्फ स्कूली बच्चों को राहत मिलेगी, बल्कि किसानों, वाहन चालकों और आम राहगीरों को भी सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस दिशा में कब तक ठोस कदम उठाता है।









