देखते ही देखते बैगा परिवार की 3 एकड़ जमीन हो गई गायब, पूरा परिवार बैठा भूख हड़ताल पर
देखते ही देखते बैगा परिवार की 3 एकड़ जमीन हो गई गायब, पूरा परिवार बैठा भूख हड़ताल पर
Nidar Chhattisgarh/Janakpur :-

मनेंद्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर : एमसीबी जिले के जनकपुर ब्लॉक मुख्यालय में गायब जमीन के विरोध में बैगा परिवार भूख हड़ताल पर बैठ गया था, भूख हड़ताल खत्म करने के दिन भी नहीं हो पाया समस्या का निराकरण
प्रतिनिधि :- रामलाल सोनी


जनकपुर । शासन द्वारा एक बैगा परिवार को 5 एकड़ पट्टे की जमीन दी गई थी। इस जमीन पर बैगा परिवार पिछले 3 पीढ़ी से रह रहा है। इस दौरान जब रिकॉर्ड निकलवाया तो उन्हे पता चला कि उनकी पुश्तैनी 3 एकड़ जमीन गायब है। अपनी जमीन को वापस पाने के लिए बैगा परिवार 16 साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर लगाकर परिवार थक चुका था। आखिर में निराश हताश होकर पूरा परिवार 16 मई को जनकपुर तहसील कार्यालय के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गया जिससे प्रशासन में हडक़ंप मच गया। बैगा परिवार को 17 मई को राजस्व विभाग की तरफ से आश्वासन मिला तो उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
सूत्रों के मुताबिक भूख हड़ताल पर बैठे बैगा परिवार को राजस्व विभाग द्वारा आश्वासन देकर बुधवार को कार्यालय बुलवाया था लेकिन एसडीएम कार्यालयीन कामकाज को लेकर मुख्यालय में अनुपस्थित थे। ऐसे में बुधवार को भी बैगा परिवार की समस्या का निराकरण नहीं हो पाया।

क्या है मामला
मनेंद्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के जनकपुर निवासी पीडि़त परिवार के पास सन् 1935 का जमीन से संबंधित रिकॉर्ड है। इस संबंध में पीडि़त गेंदलाल बैगा और पवन कुमार बैगा ने बताया कि सन् 1934-1935 के दस्तावेज में यह जमीन, खसरा क्रमांक 161/1 उनके परदादा लोधिया राम बैगा के नाम पर दर्ज है।
पीडि़त परिवार ने बताया कि लोधिया राम बैगा के 2 बेटे शुक्ला राम बैगा व चैता राम बैगा हैं, जो हमारे दादा हैं। उन्हें शासन द्वारा 5-5 एकड़ जमीन का पट्टा दिया गया था।
शुक्ला राम बैगा के बेटे प्रेमलाल बैगा के नाम पर सन् 1974-1975 में 5 एकड़ जमीन थी। लेकिन सन् 2006 में प्रेमलाल ने जब अपना रिकॉर्ड निकलवाया, तब पता चला कि उसकी 5 एकड़ की जमीन में से मात्र 2 एकड़ ही शेष है।
साथ ही नया खसरा नंबर 695/1 रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया है। जिस जमीन पर उनका पुराना घर बना हुआ है और उनके दो-तीन पीढ़ी रहते आ रहे हैं उस जमीन में से 3 एकड़ जमीन गायब हो गई है।









