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Yogita Mandavi Story: बस्तर की ‘धाकड़’ बेटी योगिता मंडावी: अनाथ होने से लेकर राष्ट्रपति भवन तक का सफर, संघर्ष देख भर आएंगी आंखें

Yogita Mandavi Story: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर की 13 वर्षीय योगिता मंडावी ने साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों, तो अभावों की जंजीरें भी तरक्की का रास्ता नहीं रोक सकतीं। राष्ट्रपति से सम्मानित होने वाली इस नन्ही जूडो चैंपियन की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है।

Yogita Mandavi Story: नई दिल्ली में शुक्रवार का दिन बस्तर के कोंडागांव जिले के लिए ऐतिहासिक रहा। यहाँ के फरसगांव की रहने वाली योगिता मंडावी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया। लेकिन इस सम्मान के पीछे एक ऐसी दास्तां छिपी है, जिसमें दो वक्त की रोटी का संघर्ष भी था और अपनों को खोने का दर्द भी।

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4 साल की उम्र में अनाथ हुईं, फिर बालिका गृह बना सहारा

Yogita Mandavi Story: योगिता का बचपन खुशियों की जगह आंसुओं से भरा रहा। बहुत छोटी उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया और जब वह मात्र 4 साल की थीं, तब सर्पदंश (सांप के काटने) की वजह से उनकी माँ भी चल बसीं। नानी के पास पली-बढ़ी योगिता को बाद में उनके चाचा-चाची ने बालिका गृह (Shelter Home) में छोड़ दिया।

Yogita Mandavi Story: वहाँ एक सहमी हुई और डरी हुई बच्ची, जो अक्सर कोनों में छुपकर रोया करती थी, उसे उसकी टीचर मणि शर्मा के रूप में एक नई ‘माँ’ और मार्गदर्शक मिली। मणि शर्मा ने ही योगिता के भीतर छिपे डर को उसकी ताकत में बदलने का हुनर सिखाया।

मैदान की जंग: 4 किलो वजन घटाने के लिए 2 दिन रहीं भूखी

Yogita Mandavi Story: जूडो के खेल में जीत के लिए तकनीक के साथ-साथ सही ‘वेट कैटेगरी’ (वजन वर्ग) का होना बहुत जरूरी है। योगिता ने बताया कि एक नेशनल टूर्नामेंट के दौरान उनका वजन थोड़ा बढ़ गया था। बाहर होने के डर से उन्होंने हार नहीं मानी।

Yogita Mandavi Story: योगिता ने बताया, “मैंने वजन कम करने के लिए दो दिन तक कुछ नहीं खाया। चक्कर आते थे, बहुत डर भी लगता था, लेकिन जब मैं जूडो मैट पर उतरी, तो अपने सारे दर्द बाहर छोड़ दिए। मैंने सामने वाले प्रतिद्वंदी को यह महसूस भी नहीं होने दिया कि मैं अंदर से कितनी कमजोर महसूस कर रही हूँ।” इसी जज्बे ने उन्हें खेलो इंडिया और नेशनल मुकाबलों में मेडल दिलाए।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात: “हौसला बढ़ गया”

Yogita Mandavi Story: राष्ट्रपति भवन में हुए सम्मान समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी योगिता से बात की। प्रधानमंत्री ने उन्हें शाबाशी देते हुए कहा कि, “इसी तरह मेहनत करती रहो और भारत का नाम रोशन करो।” वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की एक मुस्कुराहट ने योगिता के वर्षों के संघर्ष को जैसे सुकून में बदल दिया।

योगिता का अब तक का शानदार करियर

  • 3 साल में 7 नेशनल मुकाबले खेले।

  • 2024 खेलो इंडिया में सिल्वर मेडल।

  • 2025 खेलो इंडिया में ब्रॉन्ज मेडल।

  • जूडो के साथ-साथ पढ़ाई में भी अव्वल, बनना चाहती हैं ‘कलेक्टर’।

भविष्य का लक्ष्य: देश के लिए ओलंपिक मेडल और समाज के लिए सेवा

Yogita Mandavi Story: योगिता अब जूडो में देश के लिए गोल्ड मेडल लाना चाहती हैं। साथ ही उनका सपना है कि वह पढ़ाई जारी रखकर एक दिन कलेक्टर बनें। वह कहती हैं कि जूडो ने उन्हें अपने से भारी और बड़े प्रतिद्वंदी को गिराना सिखाया, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। आज वह उन हजारों बच्चों के लिए मिसाल हैं, जो मुश्किल हालातों से लड़ रहे हैं।

Pooja Chandrakar

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