
सूरजपुर जिले में घरेलू काम करने वाली 12 वर्षीय बालिका फंदे पर लटकी मिली थी। परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए आईजी से गुहार लगाई, जिसके बाद दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया।
बालिका का शव फंदे पर लटका मिला, परिवार ने जताई हत्या की आशंका
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भटगांव थाना क्षेत्र में एक 12 वर्षीय आदिवासी बालिका की मौत के मामले ने पुलिस जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम करौंधा में एक घर में घरेलू काम करने वाली इस बालिका का शव फंदे पर लटका मिला था, जिसके बाद परिजनों ने इसे हत्या बताते हुए दोबारा पोस्टमार्टम की मांग उठाई।

परिजनों का आरोप है कि शव पर चोट के निशान थे और शरीर के एक हिस्से में सूजन भी दिखी, जिसके आधार पर उन्होंने बलात्कार के बाद हत्या किए जाने की आशंका जताई। हालांकि यह आरोप अभी पुष्टि का विषय है और दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों पर स्पष्टता आ सकेगी।
पुलिस पहले ही एक बार पोस्टमार्टम करा चुकी थी, लेकिन परिवार के असंतोष और आईजी कार्यालय पहुंचने के बाद प्रशासन ने डॉक्टरों की विशेष टीम बनाकर दूसरी बार पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया।

क्या है पूरा मामला?
- सूरजपुर जिले के भटगांव थाना क्षेत्र के ग्राम करौंधा निवासी एक व्यक्ति के घर में यह बालिका घरेलू काम करती थी।
- 1 सितंबर की शाम उसका शव उसी घर में फंदे पर लटका मिला।
- सूचना मिलते ही परिजन भटगांव अस्पताल पहुंचे।
- बुधवार को पहला पोस्टमार्टम हुआ, जिसके बाद पुलिस ने शव परिवार को सौंप दिया था।
बालिका बलरामपुर जिले की रहने वाली थी और छह भाई-बहनों में एक थी। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका था, और परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते एक महिला के माध्यम से उसे घरेलू काम पर रखा गया था।
घर पहुंचते ही उठे सवाल
अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान परिजनों ने शव पर चोट के निशान देखे। उन्होंने यह भी दावा किया कि शरीर के निजी अंग में सूजन थी, जिसे देखकर परिवार को आशंका हुई कि बालिका के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई। यह आरोप फिलहाल जांच का विषय है और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इसी आशंका के चलते परिजन 3 सितंबर की देर शाम शव को पिकअप वाहन में लेकर सीधे आईजी कार्यालय पहुंच गए और दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग करने लगे।
दोबारा पोस्टमार्टम में क्या हुआ?
परिजनों की मांग और आईजी के निर्देश के बाद शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों की चार सदस्यीय टीम गठित की गई। इस टीम ने दोबारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की।
पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर बलरामपुर जिले स्थित अपने गृह ग्राम लौट गए, जहां घटना के तीन दिन बाद बालिका का अंतिम संस्कार किया गया।
आगे क्या होगा?
दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बालिका की मौत आत्महत्या थी या हत्या की गई। परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि फॉरेंसिक जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। पुलिस की भूमिका और पहली पोस्टमार्टम प्रक्रिया पर भी परिजनों ने सवाल उठाए हैं, जिस पर प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
यह मामला नाबालिगों से घरेलू काम कराए जाने की प्रथा और उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।








