प्रेग्नेंसी में ब्रेस्ट कैंसर: गांठ को सामान्य बदलाव समझकर न करें अनदेखा

प्रेग्नेंसी में ब्रेस्ट के बदलाव आम हैं, पर नई गांठ या असामान्य स्राव को नजरअंदाज न करें। जानें लक्षण, जांच के तरीके और सुरक्षित इलाज के विकल्प।
गर्भावस्था के दौरान स्तनों का आकार, संवेदनशीलता और बनावट बदलना स्वाभाविक है। यही वजह है कि कई बार किसी असामान्य बदलाव को भी लोग प्रेग्नेंसी का हिस्सा मान लेते हैं, और बीमारी की पहचान में देरी हो जाती है।

ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। पहले इसे बढ़ती उम्र की महिलाओं की समस्या माना जाता था, लेकिन अब कम उम्र की महिलाओं और कई बार गर्भावस्था के दौरान भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाला ब्रेस्ट कैंसर अपेक्षाकृत दुर्लभ है।
प्रेग्नेंसी में ब्रेस्ट कैंसर के संभावित कारण
इस बीमारी का कोई एक कारण नहीं होता। कई कारक जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं:

- बढ़ती उम्र
- परिवार में ब्रेस्ट या किसी अन्य कैंसर का इतिहास
- कुछ जेनेटिक बदलाव
- अधिक वजन
- शारीरिक गतिविधि की कमी
- शराब का सेवन
- कुछ हार्मोन संबंधी कारक
ध्यान रखने वाली बात यह है कि कई महिलाओं में कोई स्पष्ट रिस्क फैक्टर नहीं होता, फिर भी कैंसर विकसित हो सकता है।
इन लक्षणों पर रखें नजर
गर्भावस्था में स्तनों में बदलाव सामान्य हैं, लेकिन नीचे दिए संकेत दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

- कोई नई या लगातार बनी रहने वाली गांठ
- त्वचा में असामान्य बदलाव
- निप्पल का अंदर की ओर खिंचना
- निप्पल से असामान्य स्राव या रक्त आना
- बगल में गांठ
- ब्रेस्ट के किसी एक हिस्से में लगातार बना रहने वाला बदलाव
इन संकेतों को सिर्फ प्रेग्नेंसी का असर मानकर टालना ठीक नहीं है।
जांच कैसे होती है?
गांठ की शुरुआती जांच के लिए आमतौर पर अल्ट्रासाउंड किया जाता है। जरूरत पड़ने पर मैमोग्राफी और बायोप्सी भी की जाती है। कई मामलों में स्थिति के अनुसार आवश्यक इमेजिंग का सहारा लिया जाता है। किसी भी गांठ को यह सोचकर नजरअंदाज न करें कि वह प्रेग्नेंसी का सामान्य बदलाव है।
इलाज: क्या प्रेग्नेंसी में संभव है?
अगर जांच में कैंसर की पुष्टि हो जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इलाज की योजना कैंसर की अवस्था, उसके प्रकार, गर्भावस्था के कितने सप्ताह हो चुके हैं और महिला की पूरी सेहत पर निर्भर करती है।
क्या दिया जा सकता है?
- सर्जरी: प्रेग्नेंसी के दौरान भी की जा सकती है।
- कीमोथेरेपी: कुछ परिस्थितियों में पहली तिमाही के बाद दी जा सकती है। इसके लिए कैंसर विशेषज्ञ और गायनेकोलॉजिस्ट की संयुक्त निगरानी जरूरी होती है।
क्या टाला जाता है?
सामान्यतः रेडिएशन थेरेपी, हार्मोन थेरेपी और कई लक्षित उपचार गर्भावस्था के दौरान टाले जाते हैं और डिलीवरी के बाद दिए जा सकते हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि प्रेग्नेंसी की वजह से इलाज रोकना पड़ता है। योजना इस तरह बनाई जाती है कि मां के कैंसर नियंत्रण और गर्भ में पल रहे शिशु की सुरक्षा, दोनों का ध्यान रखा जा सके।
आगे क्या करें?
अगर आपको स्तनों में कोई असामान्य बदलाव दिखे या मन में शक हो, तो खुद अंदाजा लगाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। समय पर जांच और विशेषज्ञ की देखरेख सबसे अहम है।









