महादेव ऐप केस: सौरभ चंद्राकर 12 नवंबर तक CBI रिमांड पर, ED का आवेदन खारिज

महादेव सट्टा ऐप के संचालक सौरभ चंद्राकर को 12 नवंबर तक CBI रिमांड पर भेजा गया। कोर्ट ने ED के वारंट वाले आवेदन को प्री-मैच्योर बताया। जानें पूरा अपडेट।
महादेव ऐप मामले में आरोपी सौरभ चंद्राकर को रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने 12 नवंबर तक CBI की कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया है। बुधवार को पेशी के बाद अगले 8 दिनों तक एजेंसी उससे पूछताछ करेगी।

CBI ने रिमांड आवेदन में दावा किया है कि सट्टा कारोबार चलाने के लिए पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी दी जाती थी। एजेंसी इसी नेटवर्क की परतें खोलना चाहती है।
उधर, ED ने अपना गैर-जमानती वारंट लागू कराने के लिए आवेदन दिया था, जिसे कोर्ट ने समय से पहले का (प्री-मैच्योर) बताया। अब सबकी नजर 12 नवंबर की पेशी पर है।

CBI रिमांड में क्या तय हुआ?
कोर्ट के आदेश के मुताबिक:
- सौरभ चंद्राकर 12 नवंबर तक CBI की कस्टडी में रहेगा
- पूछताछ के लिए उसे दिल्ली के अलावा देश के किसी भी हिस्से में ले जाया जा सकता है
- कहीं ले जाने से पहले उसके वकील या रिश्तेदारों को सूचना देनी होगी
- सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उसे दिल्ली ले जाया गया है
CBI ने रिमांड आवेदन में क्या कहा?
CBI के अनुसार सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक का संस्थापक प्रमोटर है और उसे पूरे नेटवर्क की जानकारी है। एजेंसी पूछताछ में इन बिंदुओं पर जानकारी जुटाना चाहती है:

- अन्य मास्टरमाइंड की भूमिका
- हवाला ऑपरेटर
- अवैध कमाई के लाभार्थी
- संपत्तियों का ब्योरा
एजेंसी का दावा है कि पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रभावशाली राजनीतिक लोगों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी दी जाती थी। यह रकम किन लोगों तक पहुंची, CBI यह पता लगाना चाहती है। ये एजेंसी के आरोप हैं और जांच का विषय हैं।
हर महीने 450 करोड़ की कमाई का दावा
CBI के अनुसार, 2020 में लॉकडाउन के बाद से सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगी ऑनलाइन सट्टेबाजी से हर महीने करीब 450 करोड़ रुपए की अवैध कमाई कर रहे थे।
- एजेंसी के मुताबिक, इसका 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटर रखते थे
- बाकी रकम पैनल ऑपरेटरों को दी जाती थी
- प्रचार के लिए विज्ञापनों और बड़े आयोजनों पर खर्च किया गया, जिनमें फिल्म और मनोरंजन जगत की हस्तियों को बुलाया जाता था
दुबई से संचालन और हवाला का आरोप
CBI का कहना है कि सिंडिकेट का मुख्यालय दुबई में था। छत्तीसगढ़ के कई युवाओं को कर्मचारी, मैनेजर और सुपरवाइजर के तौर पर रखा गया था। एजेंसी के मुताबिक, लेनदेन के लिए फर्जी दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाए गए और हवाला के जरिए रकम विदेश भेजी जाती थी।
कोर्ट में सौरभ से मिलने कौन पहुंचा?
पेशी के दौरान दो लोग उससे मिलने पहुंचे:
- विनोद सेवनलाल चंद्राकर: महासमुंद के पूर्व कांग्रेस विधायक। शुरुआत में अधिकारियों ने उन्हें रोका, फिर सौरभ ने खुद उन्हें अपना मामा बताया। दोनों के बीच करीब 1 से 2 मिनट बातचीत हुई।
- विशाल रमानी: महादेव ऐप मामले में ED का आरोपी और पैनल ऑपरेटर। उसने भी सौरभ से मुलाकात की और कुछ देर बाद चला गया।
कौन है विशाल रमानी?
ED के दस्तावेजों के हवाले से:
- भिलाई के सुपेला का निवासी
- 2011 से क्रिकेट मैचों पर अवैध सट्टेबाजी में शामिल
- 2020 से सौरभ चंद्राकर के साथ ऑनलाइन सट्टा चलाने का आरोप
- 2021 में सौरभ आहूजा के साथ मिलकर महादेव ऐप के करीब 100 पैनल लेने का आरोप
- ED के अनुसार कारोबार से करीब 30 करोड़ रुपए की कमाई, जिसमें उसका हिस्सा 15 करोड़ रुपए
- आरोप है कि इस रकम से परिवार के नाम संपत्ति और सोना खरीदा गया, और लेनदेन में किराए के बैंक खातों व हवाला का इस्तेमाल हुआ
ED के आवेदन पर कोर्ट ने क्या कहा?
ED के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि 2023 में ED कोर्ट ने सौरभ के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था, जो अब तक लागू नहीं हो सका। ED चाहती थी कि CBI रिमांड खत्म होने वाले दिन ही उसे वारंट पर कार्रवाई की अनुमति मिल जाए।
कोर्ट ने आवेदन को प्री-मैच्योर माना और कहा कि इसकी जरूरत जिस दिन होगी, उसी तारीख को आवेदन किया जाए।
12 नवंबर के बाद आगे क्या होगा?
12 नवंबर को सौरभ को दिल्ली से रायपुर लाकर CBI की स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा।
- CBI और रिमांड मांगती है तो उसकी हिरासत बढ़ सकती है
- नहीं मांगती, तो ED दोबारा कोर्ट में आवेदन देकर वारंट लागू कराने की कोशिश कर सकती है
- ED मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है, इसलिए उसकी पूछताछ में सट्टे की कमाई, हवाला, बेनामी संपत्तियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों पर फोकस रह सकता है
यानी 12 नवंबर के बाद साफ होगा कि सौरभ की हिरासत CBI के पास रहेगी या ED को मिलेगी।
ध्यान रहे, ये सभी जांच एजेंसियों के आरोप हैं। इनकी सच्चाई अदालत में सुनवाई के बाद ही तय होगी।









