छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन: पटना के मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस

पटना के मेदांता अस्पताल में चल रहा था इलाज
छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन:छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन: पटना के मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस, जानकारी के अनुसार, पूर्व डीजीपी विश्वरंजन पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। पिछले महीने उनकी स्थिति अधिक बिगड़ने के कारण उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें हृदय से जुड़ी गंभीर समस्याएं थीं। विशेषज्ञों की टीम की तमाम कोशिशों के बावजूद, शनिवार रात उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पुलिस महकमे और प्रशासनिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
छत्तीसगढ़ के छठे पुलिस महानिदेशक के रूप में सेवाएं
छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन:विश्वरंजन छत्तीसगढ़ के पुलिस इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। वे राज्य के छठे डीजीपी (DGP) थे। साल 2007 में तत्कालीन डीजीपी ओपी राठौर के आकस्मिक निधन के बाद राज्य सरकार ने विश्वरंजन को इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने लगभग चार वर्षों तक प्रदेश की पुलिस कमान संभाली और पुलिसिंग को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाई।
1973 बैच के आईपीएस अधिकारी का शानदार करियर
छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन:विश्वरंजन 1973 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी थे। उनका प्रशासनिक और सुरक्षा करियर बेहद प्रभावशाली रहा। मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित किया गया था। हालांकि, डीजीपी बनने से पहले उन्होंने केंद्र में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दी थीं। वे लंबे समय तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में प्रतिनियुक्ति पर रहे, जहाँ उन्होंने एडिशनल डायरेक्टर जैसे उच्च पदों पर कार्य किया।
नक्सल मोर्चे और कानून-व्यवस्था पर विशेष पकड़
छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन:अपने कार्यकाल के दौरान विश्वरंजन को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए कई कड़े कदम उठाए और पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य किया। उनकी बौद्धिक क्षमता और रणनीतिक कौशल की प्रशंसा आज भी पुलिस विभाग में की जाती है।



















