पत्रकारों की सुरक्षा: भारत की स्थिति और दुनिया में क्या है हाल?

मुकेश चंद्राकर की हत्या: एक दुखद घटना
बीजापुर, छत्तीसगढ़ में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या ने पूरे देश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। मुकेश चंद्राकर ने सुरेश चंद्राकर नामक ठेकेदार के सड़क निर्माण के भ्रष्टाचार को उजागर किया था, जिसके कारण उनकी जान चली गई। हत्या का मास्टरमाइंड सुरेश चंद्राकर पुलिस की गिरफ्त में है, और पूछताछ की जा रही है। इस मामले में सुरेश के तीन भाईयों समेत चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
मुकेश की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनकी हत्या की भयावहता का खुलासा हुआ है। उनके सिर पर दर्जनों चोटें पाई गईं, शरीर में कई हड्डियां टूटी थीं, और उनकी मौत अत्यधिक क्रूरता से हुई थी। पत्रकारों की सुरक्षा: भारत की स्थिति और दुनिया में क्या है हाल?
भारत में पत्रकारों की सुरक्षा: स्थिति क्या है?
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल औसतन तीन से चार पत्रकारों की हत्या होती है। इसके साथ ही पत्रकारों को ऑनलाइन उत्पीड़न, धमकियां, और हमलों का सामना भी करना पड़ता है। इसके अलावा, कई पत्रकारों को आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ता है और गिरफ्तारी भी होती है।
यूनेस्को और ऑब्जर्वेटरी ऑफ किल्ड जर्नलिस्ट्स की रिपोर्ट के अनुसार, 1993 से अब तक दुनियाभर में 1,728 पत्रकारों की हत्या हो चुकी है, जिसमें से 457 पत्रकार एशिया में मारे गए, और भारत में 60 पत्रकारों की हत्या हुई है। पत्रकारों की सुरक्षा: भारत की स्थिति और दुनिया में क्या है हाल?
दुनिया में पत्रकारों की स्थिति: पाकिस्तान की स्थिति और भी खराब
पाकिस्तान की स्थिति और भी गंभीर है। पाकिस्तान में 1993 से अब तक 101 पत्रकारों की हत्या हो चुकी है। यह आंकड़ा इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान में पत्रकारों की सुरक्षा की स्थिति अत्यंत गंभीर है। पत्रकारों की सुरक्षा: भारत की स्थिति और दुनिया में क्या है हाल?
भारत में पत्रकारों के लिए सुरक्षा उपायों की आवश्यकता
पत्रकारों के खिलाफ बढ़ते हमले और उत्पीड़न को देखते हुए सरकार को कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधान और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। पत्रकारों की सुरक्षा: भारत की स्थिति और दुनिया में क्या है हाल?



















