नक्सलवाद पर प्रहार: अबूझमाड़ के जंगलों में गरजेंगी 200 हाई-टेक बाइकें, सुरक्षा बलों को मिली ‘सुपर पावर’

Abujhmad Anti-Naxal Operation: नक्सलवाद पर प्रहार: अबूझमाड़ के जंगलों में गरजेंगी 200 हाई-टेक बाइकें, सुरक्षा बलों को मिली ‘सुपर पावर’, छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाकों में शुमार ‘अबूझमाड़’ में अब नक्सल विरोधी अभियान को एक नई गति मिलने वाली है। क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों में सुरक्षा बलों की पहुंच को आसान बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है।
अत्याधुनिक टीवीएस रोनिन 225cc से लैस हुए जवान
नक्सलवाद पर प्रहार:नक्सल मोर्चे पर तैनात डीआरजी (DRG) और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को 200 नई हाई-टेक मोटरसाइकिलें सौंपी गई हैं। ये टीवीएस रोनिन 225 सीसी (TVS Ronin 225cc) बाइकें अपनी शक्ति और मजबूती के लिए जानी जाती हैं, जो उबड़-खाबड़ रास्तों और संकरी पगडंडियों पर चलने में बेहद कारगर साबित होंगी।
प्रमुख मंत्रियों ने दिखाई हरी झंडी
नक्सलवाद पर प्रहार:इस विशेष पहल की शुरुआत प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप की गरिमामयी उपस्थिति में हुई। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मंत्रियों ने जवानों को हेलमेट और बाइक की चाबियां सौंपी और हरी झंडी दिखाकर इस नई टुकड़ी को रवाना किया। अधिकारियों का मानना है कि इन वाहनों से जवानों की ऑपरेशनल क्षमता में कई गुना इजाफा होगा।
दुर्गम इलाकों में त्वरित मूवमेंट और गश्त
नक्सलवाद पर प्रहार:अबूझमाड़ की पहाड़ियों और सघन वनों में बड़े वाहनों का पहुंचना अक्सर मुश्किल होता है। ऐसे में ये 200 शक्तिशाली बाइकें सुरक्षा बलों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होंगी:
तेज रिस्पांस: सूचना मिलते ही जवान कम समय में मौके पर पहुंच सकेंगे।
बेहतर गश्त: जंगलों के भीतर पगडंडियों पर नियमित पेट्रोलिंग संभव होगी।
प्रशासनिक मजबूती: अंदरूनी इलाकों के कैंपों और थानों के बीच समन्वय और रसद आपूर्ति तेज होगी।
2020 से अब तक: एक बड़ी उपलब्धि
नक्सलवाद पर प्रहार:उल्लेखनीय है कि सुरक्षा बलों को बाइक से लैस करने की यह योजना वर्ष 2020 में मात्र 50 मोटरसाइकिलों के साथ शुरू हुई थी। अब 200 नई बाइकों के बेड़े में शामिल होने से सुरक्षा तंत्र पहले से कहीं अधिक मजबूत और तकनीकी रूप से उन्नत हो गया है।
बढ़ेगा जनता का भरोसा और सुरक्षा
नक्सलवाद पर प्रहार:जानकारों के अनुसार, जब सुरक्षा बल अंदरूनी इलाकों में अधिक सक्रिय होंगे, तो इससे न केवल नक्सलियों की गतिविधियों पर लगाम लगेगी, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के बीच भी सुरक्षा और विश्वास का माहौल पैदा होगा। थानों और कैंपों के स्तर पर वाहनों की उपलब्धता से पुलिसिंग और प्रशासनिक कार्यों के निष्पादन में तेजी आएगी।



















