भिलाई निगम चुनाव: दिवाली पोस्टरों के जरिए प्रचार में जुटे दावेदार

भिलाई नगर निगम चुनाव में दो महीने बाकी हैं, पर दिवाली की बधाई वाले पोस्टरों से दावेदारों ने प्रचार शुरू कर दिया है। आरक्षण बदलने से वार्ड भी बदल रहे हैं।
भिलाई नगर पालिक निगम के चुनाव में अभी करीब दो महीने का समय है, लेकिन शहर की सड़कों पर चुनावी माहौल अभी से दिखने लगा है। दिवाली की शुभकामनाओं के नाम पर संभावित प्रत्याशियों के पोस्टर, होर्डिंग और कटआउट चौक-चौराहों से लेकर गली-मोहल्लों तक लग गए हैं।

सीधे वोट मांगने के बजाय त्योहार के बहाने जनता के बीच नाम और चेहरा पहुंचाने की यह रणनीति इन दिनों चर्चा में है। इधर वार्ड आरक्षण तय होने के बाद कई दावेदारों के समीकरण भी बदल गए हैं।
त्योहार की बधाई के बहाने चुनावी तैयारी
शहर के प्रमुख चौराहों, मोहल्लों और बिजली के खंभों पर दीपावली की शुभकामनाओं वाले बड़े पोस्टर और कटआउट बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं। चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले यह दावेदारों के लिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का आसान तरीका बन गया है।

पोस्टरों में क्या दिख रहा है?
- ऊपर देवी-देवताओं और वरिष्ठ नेताओं की तस्वीरें
- बीच में दावेदार का बड़ा फोटो
- नीचे “आपका अपना, वार्ड का बेटा” जैसे भावनात्मक नारे
- कुछ पोस्टरों पर QR कोड, जिससे लोग दावेदार के सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़ सकें
- कई इलाकों में मिठाई, दीये और तेल के पैकेट बांटने की तैयारी
बधाई संदेश ही क्यों बना पसंदीदा रास्ता?
दावेदारों की इस रणनीति के पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
- पार्टी के भीतर टकराव से बचाव: खुद को उम्मीदवार बताने पर विरोधी गुट सक्रिय हो सकते हैं और टिकट कटवाने की कोशिश कर सकते हैं।
- हर घर तक पहुंच: शुभकामना संदेश के जरिए बिना किसी चुनावी विवाद के नाम और चेहरा घर-घर पहुंच जाता है।
आरक्षण बदलते ही बदले वार्ड
वार्ड आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद कई अनुभवी नेताओं का गणित बिगड़ गया है। जिनके अपने वार्ड आरक्षित हो गए, वे अब पड़ोसी सामान्य वार्डों में संभावना तलाश रहे हैं।

इसका असर पोस्टरों पर भी दिख रहा है। रातों-रात पड़ोसी वार्डों में नए पोस्टर लग रहे हैं और कई जगह एक ही खंभे पर अलग-अलग दलों के दावेदारों के पोस्टर एक-दूसरे के ऊपर चिपके दिख रहे हैं।
मतदाता भी पूछ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बधाई देने वालों की कतार लग जाती है, लेकिन जीतने के बाद कई चेहरे पांच साल तक नजर नहीं आते। कुछ मोहल्लों में जागरूक नागरिक पोस्टरों पर छपे मोबाइल नंबरों पर फोन कर नाली, सड़क और सफाई की समस्याएं सीधे बता रहे हैं। इससे बधाई के जरिए पहचान बनाने निकले दावेदारों के लिए जवाबदेही का सवाल खड़ा हो रहा है।
आगे क्या?
चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ दावेदारों की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है। पार्टियों की ओर से टिकट को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। फिलहाल कौन उम्मीदवार बनेगा, यह तय नहीं है और पोस्टर लगाने का मतलब टिकट मिलना नहीं है।









